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माघ मेला : प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर उमड़ी भीड़, कल्पवास शुरू

  • जगह जगह चाय नाश्ता एवं भण्डारा शुरू

प्रयागराज। पौष पूर्णिमा के साथ ही संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले की शुरुआत आज से हो गई। लोगों का कल्पवास शुरू हो गया। यह पांच फरवरी को माघी पूर्णिमा तक चलेगा। वहीं कुछ ऐसे श्रद्धालु हैं जिनका आगमन मकर संक्रान्ति पर होता है। आज पौष पूर्णिमा पर्व पर भीषण ठण्ड के बावजूद पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ संगमनगरी में जुटी रही।

संगम की रेती पर स्नान के साथ ही जगह-जगह चाय नाश्ता एवं भण्डारा शुरू हो गया। जहां लोग स्नान के बाद प्रसाद भी ग्रहण कर रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्नानार्थी और बड़ी संख्या में मजदूर मेला क्षेत्र में चल रहे ओम नमः शिवाय, ओल्ड जीटी रोड पर स्थित चरखी दादरी आश्रम हरियाणा और महावीर मार्ग पर लगे तपस्वी नगर में भण्डारे का प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। यह अन्नक्षेत्र माघी पूर्णिमा तक मेला क्षेत्र में दिन-रात चलता रहेगा।

ओम नमः शिवाय के गुरुदेव का कहना है कि उनका संकल्प है कि माघ मेला, कुंभ मेला और अर्ध कुंभ मेला में स्नान के दौरान जो भी लोग तीर्थराज प्रयाग में गंगा और संगम में स्नान करें वह लोग बिना खाना खाए घर वापस न जाने पाएं। माघ मेला के ओल्ड जीटी रोड पर स्थित चरखी दादरी आश्रम में विशाल अन्न क्षेत्र शुरू हो गए हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। चरखी दादरी आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने बताया कि शिविर में प्रतिदिन सुबह पांच बजे से चाय-नाश्ते के वितरण के साथ कार्यक्रम शुरू होता है। देर रात तक बड़ी संख्या में लोग खाना खाते हैं। उन्होंने बताया कि शिविर में चाय, नाश्ता, खाना, रामलीला और रासलीला माघी पूर्णिमा तक चलता रहेगा।

कल्पवास से मिलती है आत्मिक शांति : ब्रह्माश्रम महाराज

अखिल भारतीय दण्डी स्वामी सन्यासी प्रबन्धन समिति के महामंत्री और हरियाणा चरखी दादरी आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम जी महाराज का शिविर माघ मेला में लगा हुआ है। जहां शुक्रवार से कार्यक्रम भी शुरू हो गया। स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने बताया कि वह विश्व शांति और चतुर्दिक उन्नति के लिए कल्पवास करते हैं। इससे उन्हें आत्मिक शान्ति मिलती है। आत्मा और शरीर को दैवीय शक्ति भी मिलती है। इसलिए अधिक से अधिक लोगों को चाहिए कि वह एक माह तक कल्पवास के लिए प्रयाग में जरूर आयें। यहां आने से उनकी दुनिया के मोह माया के बजाय आत्मिक शान्ति की अनुभूति और दैवीय शक्ति की प्राप्ति होती है।

उन्होंने बताया कि शिविर में माघी पूर्णिमा तक प्रतिदिन सुबह पांच बजे से सात बजे तक चाय एवं नाश्ता, दोपहर में श्रीमद्भागवत कथा-प्रवचन एवं अन्न क्षेत्र चलेगा। इसके अलावा रात में रामलीला और रासलीला होगी। पीठाधीश्वर दण्डी स्वामी ने बताया कि आज से कल्पवास भी शुरू हो जायेगा। इसी दिन से माघ मास में एक महीने का कल्पवास संगम की रेती पर शुरू होता है। कल्पवास के दौरान गंगा में स्नान के बाद दान से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है और वह भव सागर से मुक्ति पाता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वह विश्व प्रसिद्ध माघ मेले में एक माह तक अवश्य कल्पवास करें।

उल्लेखनीय है कि इसके बाद 14 और 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 21 जनवरी को मौनी अमावस्या और 26 जनवरी को बसंत पंचमी तथा पांच फरवरी को माघी पूर्णिमा और 18 फरवरी को महाशिवरात्रि का स्नान होगा।

700 हेेक्टेयर में बसाया गया मेला क्षेत्र

इस बार मेला क्षेत्र 700 हेक्टेयर में बसाया गया है। छह सेक्टर में लगे माघ मेला के हर सेक्टर में एक सेक्टर मजिस्ट्रेट के साथ एक डिप्टी एसपी की भी तैनाती की गई है। ड्रोन कैमरे से मेले की निगरानी हो रही हैै। पीडब्ल्यूडी की ओर से आवागमन के लिए लगभग 150 किलोमीटर चकर्ड प्लेट बिछाई गई है। आवागमन के लिए पांच पांटून ब्रिज भी बनाए गए हैं। सम्पूर्ण मेला क्षेत्र में शान्ति व सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस विभाग सुरक्षा के लिए करीब ढाई हजार पुलिस फोर्स तैनात की गई है। माघ मेले में 14 थाने, 38 पुलिस चौकियां और 15 फायर स्टेशन बनाए गए हैं।

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