उत्तर प्रदेशवाराणसी

काशी के धरहरा मस्जिद में नमाज पर रोक के लिए कोर्ट में याचिका

  • याचिकाकर्ताओं का दावा- बिंदु माधव मंदिर तोड़कर औरंगजेब ने बनवाई थी मस्जिद

वाराणसी। ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी प्रकरण के बीच पंचगंगा घाट स्थित धरधरा मस्जिद भी अब सुर्खियों में है। गायघाट निवासी अतुल सहित पांच लोगों ने वाराणसी के सिविल कोर्ट (जूनियर डिविजन) में याचिका दायर कर धरहरा मस्जिद में नमाज पर रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि पंचगंगा घाट पर भगवान बिंदु माधव (विष्णु जी) का मंदिर था। मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बना दिया था।

फिलहाल ये मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास है, लेकिन मुस्लिम यहां अनधिकृत रूप से नमाज पढ़ते हैं। अदालत ने वाद दर्ज करने का आदेश देते हुए सुनवाई की तिथि 04 जुलाई तय की है। मामले में सादिक अली, जमाल और मुन्ना को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि बिंदु माधव मंदिर के बड़े चबूतरे के ऊपर ही धरहरा मस्जिद बनवाई गई है। पौराणिक मान्यता है कि पंचगंगा घाट पर गंगा में यमुना, वरुणा, सरस्वती नदी और एक और नदी गुप्त रूप से मिलती है।

इस घाट का प्राचीन नाम बिंदु माधव घाट रहा। माना जाता है कि बिंदु माधव मंदिर का निर्माण राजस्थान के राजा मान सिंह ने कराया था। औरंगजेब ने 1669 में जब मंदिर को तोड़ दिया था तो बिंदु माधव का नया मंदिर बनाया गया। इसे 18वीं सदी में सतारा के शासक के प्रतिनिधि भावन राव ने बनवाया था। इस मंदिर की तुलना पुरी के जगन्नाथ मंदिर से की जाती है। पंचगंगा घाट पर शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है। इसके बाद मौजूदा बिंदु माधव मंदिर के लोग दर्शन करते हैं। काशीखंड में भी पुराने बिंदु माधव मंदिर का उल्लेख है। काशी के विवादित राष्ट्रीय स्मारक माधवराव धरहरा पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए वर्ष में दो बार शिवसेना के कार्यकर्ता अपनी गिरफ्तारी देते हैं।

एक हिन्दुत्वविष्ठ संगठन के चर्चित नेता अरुण पाठक तो कई बार कह चुके हैं कि कितनी बड़ी विडम्बना है कि एक तरफ प्रधानमंत्री लालकिले से अपनी उपलब्धियां गिनाते हैं, दूसरी तरफ उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में राष्ट्रध्वज फहराने के जुर्म में शिवसैनिकों को गिरफ्तार किया जाता है। उत्तर प्रदेश को कश्मीर बनाने की कोशिश की जा रही है जहां पाकिस्तानी झंडे तो लहराए जाते हैं, पर धरहरे पर राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने की आजादी नहीं है। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर माधव जनार्दन रटाटे की मानें तो औरंगजेब ने काशी को काफी नुकसान पहुंचाया था। उसने यहां के कृतिवाशेश्वर, बिंदु माधव और काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया था। ओंकारेश्वर मंदिर के आसपास भी कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया था। मस्जिद के गंगा घाट वाले हिस्से में जाने पर मंदिर के अवशेष दिखाई पड़ेंगे।

राजमंदिर इलाके के निवासी पत्रकार और समाजसेवी प्रवीण तिवारी ‘गुड्डू’ बताते हैं कि धरहरा मस्जिद के नीचे मौजूद तहखाने की अगर जांच की जाए तो वहां से बहुत सारे शिवलिंग और विष्णु भगवान की मूर्तियां मिलेंगी। इतिहास में जिक्र है कि बिंदु माधव यानी भगवान विष्णु के रूप की यहां पूजा होती थी और बहुत विशाल मंदिर था। उन्होंने बताया कि यह बनारस की सबसे ऊंची इमारत थी, क्योंकि इसमें दो सबसे ऊँची मीनारें थीं, लेकिन कमजोर हो जाने के चलते इसे लगभग 100 साल पहले ही गिरा दिया गया था। जहां मस्जिद है पहले उसे विष्णु क्षेत्र भी कहा जाता था और जिस घाट पर यह है उसे पंचनद तीर्थ कहा जाता है। बिंदु माधव मंदिर को 1580 में रघुनाथ टंडन ने बनवाया था। इसे औरंगजेब ने 1669 में तोड़कर आलमगीर मस्जिद बना दिया। जिसे धरहरा मस्जिद भी कहते हैं।

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