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प्रदेश सरकार संकट की इस घड़ी में बाढ़ प्रभावितों के साथ खड़ी : मुख्यमंत्री

प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को राहत किट के माध्यम से आवश्यक खाद्य सामग्री एवं दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही

लखनऊ : 29 अगस्त, 2026   उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी प्रभावित परिवार को राहत एवं सहायता के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ निरन्तर मिलता रहेगा। बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सरकार द्वारा प्रारम्भ किए गए प्रयासों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
मुख्यमंत्री जी आज जनपद बलिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के बावजूद जिस धैर्य, साहस और हिम्मत के साथ बलिया के लोगों ने परिस्थितियों का सामना किया, वह अभिनन्दनीय है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों द्वारा प्रशासन का सहयोग करने के लिए उनका हृदय से अभिनन्दन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वह स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद यहां पहुंचे हैं। बांसडीह, बलिया और बैरिया विधानसभा क्षेत्रों में जहां भी कटान अथवा जलप्लावन के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है, वहां का निरीक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि वह लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सम्पर्क में रहे तथा कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की, ताकि किसी भी पीड़ित परिवार को कठिनाई न हो।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश में हुई अतिवृष्टि के कारण लगभग 26 जनपद बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन जनपदों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं। लगभग 1.71 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 251 गांवों में बाढ़ का प्रभाव पड़ा है। 01 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाढ़ शरणालयों में रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की निगरानी एवं संचालन के लिए 447 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र में राहत केन्द्रों की व्यवस्था की गई है। इन राहत केन्द्रों पर बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, रहने की व्यवस्था तथा आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश में बाढ़ प्रभावित जनपदों की संख्या पूर्व की तुलना में कम हुई है। पहले बारिश के दौरान लगभग 36 से 40 जनपद बाढ़ से प्रभावित होते थे, जबकि इस बार लगभग 26 जनपद प्रभावित हुए हैं। इस बार जनहानि न्यूनतम रही है। बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदियों को चैनलाइज करने तथा आवश्यकतानुसार ड्रेजिंग कर नदी की धारा को व्यवस्थित करने पर कार्य किया जा रहा है। विशेष रूप से घाघरा नदी में जहां आवश्यकता है, वहां ड्रेजिंग एवं चैनलाइजेशन कराया जाएगा। ड्रेजिंग से निकलने वाली सिल्ट का उपयोग तटबंधों को मजबूत करने में किया जा सकता है। आवश्यक स्थानों पर बोल्डर से ठोकर बनाकर कटान को रोका जाए, ताकि भविष्य में बाढ़ की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सके। बाढ़ से स्थायी सुरक्षा मिलने पर किसान प्रत्येक मौसम में अपनी उपजाऊ भूमि पर खेती कर सकेंगे और उनकी आय एवं जीवन-स्तर में सुधार होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को राहत किट के माध्यम से आवश्यक खाद्य सामग्री एवं दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राहत किट में 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 02 किलो अरहर की दाल, 02 किलो चना, 02 किलो भुना चना, 01 किलो चीनी, बिस्किट, माचिस, मोमबत्ती, नहाने का साबुन, कपड़े धोने का साबुन, मसाले, 01 किलो रिफाइण्ड तेल, 01 किलो नमक, सैनिटरी पैड, डिस्पोजल बैग, डेटॉल, 10 किलो आलू, लाई, बाल्टी, मग, टॉर्च और छाता सहित अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इसके अतिरिक्त प्रभावित परिवारों को मेडिसिन किट भी उपलब्ध कराई जा रही है। आवश्यकतानुसार दवाएं तथा पर्याप्त मात्रा में क्लोरीन की गोलियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से लोगों को बचाया जा सके। बाढ़ के दौरान सांप, बिच्छू एवं अन्य जहरीले जीव-जन्तुओं के काटने की घटनाओं की आशंका रहती है। इसके साथ ही कुत्ते के काटने अथवा जंगली जानवरों के हमले की स्थिति में भी तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा जिला अस्पतालों में एण्टी-स्नेक वेनम एवं एण्टी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मनुष्य को राहत पहुंचाना ही नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के पशुधन को भी सुरक्षित रखना है। पशुओं के टीकाकरण, दवाओं तथा उनके लिए आवश्यक खाद्य सामग्री जैसे भूसा एवं चारे की व्यवस्था भी की जा रही है। गर्भवती महिलाओं, माताओं एवं बच्चों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अलग से राहत एवं देखभाल की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सक्रिय प्रयासों के कारण राहत कार्यों को गति मिल रही है। जब जनता अच्छे जनप्रतिनिधियों का चुनाव करती है तो विकास कार्यों के साथ-साथ संकट के समय राहत एवं बचाव कार्य भी तेजी से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने बांसडीह क्षेत्र की विधायक श्रीमती केतकी सिंह, बलिया नगर के विधायक श्री दयाशंकर सिंह तथा बैरिया के विधायक श्री हंसू राम द्वारा लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे राहत कार्यों की सराहना की।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अभी राहत किट वितरण के दौरान उन्होंने देखा कि प्रत्येक परिवार को लगभग 50-50 किलो तक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन द्वारा वाहनों के माध्यम से राहत सामग्री को लाभार्थियों के घर तक पहुंचाया जा रहा है। यही सुशासन और संवेदनशील सरकार की पहचान है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई। पहले दिन 07 लाख बहनों ने तथा दूसरे दिन 60 लाख बहनां से अपनी सहयात्री के साथ यात्रा की। बहनों ने इस सुविधा का लाभ उठाकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। यह सुविधा आज भी उपलब्ध है। आगामी 30 अगस्त से प्रदेश की 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा का अवसर भी प्राप्त होगा। वे प्रदेश में कहीं भी काशी, अयोध्या, गोरखपुर, लखनऊ अथवा अन्य स्थानों पर निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आपदा राहत व्यवस्था को संवेदनशील एवं व्यापक बनाया है। सर्पदंश से किसी व्यक्ति की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर प्रभावित परिवार को आपदा राहत के दायरे में लाकर तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। वन्य जीव संघर्ष में जंगली जानवरों के हमले से होने वाली मृत्यु से पीड़ित परिवारों को आपदा राहत के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाती है। किसान, बटाईदार अथवा उनके परिवार के किसी सदस्य की बाढ़, आकाशीय बिजली अथवा अन्य अधिसूचित प्राकृतिक आपदा में मृत्यु होने पर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के माध्यम से प्रभावित परिवार को 05 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यदि बाढ़ के कारण किसी गरीब का मकान अथवा झोपड़ी कट जाती है तो प्रभावित परिवार को जमीन का पट्टा उपलब्ध कराने के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है। इसी प्रकार अग्निकाण्ड से गरीब परिवार का मकान अथवा झोपड़ी नष्ट होने पर भी तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ आवास की सुविधा सुनिश्चित की जाती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार गरीब, किसान, नौजवान, माताओं-बहनों और अन्नदाता किसानों के हित में पूरी संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ कार्य कर रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि संकट की घड़ी में कोई भी परिवार अकेला महसूस न करे। पात्र व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण प्रदेश विकास की दौड़ में पिछड़ गया था। प्रदेश में पहले माफियाओं की समानांतर सत्ता चलती थी, गरीबों की जमीनों पर कब्जे होते थे तथा व्यापारियों एवं उद्यमियों को परेशान किया जाता था। डबल इंजन सरकार में माफिया एवं अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई है। अब प्रदेश में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ नहीं, बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ की दिशा में काम हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बलिया में महर्षि भृगु के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बलिया में महर्षि भृगु धाम कॉरिडोर का निर्माण भी कराया जा रहा है। बलिया की ऐतिहासिक एवं स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवशाली भूमिका रही है। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए लोक नायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन की भी बलिया से महत्वपूर्ण स्मृति जुड़ी हुई है। जयप्रकाश नारायण जी की पावन भूमि सिताबदियारा जाने का उन्हें कई बार अवसर मिला है और शीघ्र ही वहां के लिए भ्रमण कार्यक्रम तय किया जाएगा। लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण अन्तरराष्ट्रीय केन्द्र पर पिछली सरकार द्वारा 864 करोड़ रुपये खर्च किए गए, इसके बावजूद कार्य अधूरा रहा। जनता के धन का उपयोग जनहित में होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत हितों और भ्रष्टाचार के लिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बलिया के ऐतिहिसिक एवं स्वतन्त्रता आन्दोलन में गौरवशाली भूमिका रही है। यह मंगल पाण्डेय की धरती है। वर्ष 1942 में स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी चित्तू पाण्डेय के नेतृत्व में बलिया ने स्वयं को स्वतन्त्र घोषित कर दिया था। मुख्यमंत्री जी ने बलिया के लोगों की प्रतिभा, ऊर्जा एवं परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि बलिया की अपनी विशिष्ट पहचान है। बलिया के लोग देश और दुनिया में जहां भी गए, उन्होंने अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर अलग पहचान बनाई। बलिया की यही ऊर्जा और प्रतिभा विकास के नए अवसरों के साथ आगे बढ़े, इसके लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
बलिया के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। मेडिकल कॉलेज, ग्रीन एक्सप्रेस-वे, बाईपास, फोरलेन मार्ग, महर्षि भृगु धाम कॉरिडोर तथा बस अड्डों सहित विभिन्न विकास परियोजनाओं से बलिया को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि बलिया के विकास की गति को और तेज किया जाएगा तथा यहां के लोगों को विकास के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्री जी ने सभी बाढ़ पीड़ित परिवारों के शीघ्र सामान्य जीवन की कामना करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार बलियावासियों की सुरक्षा, सुशासन और गरीब कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है।
इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ0 दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री श्री दानिश आजाद अंसारी, सांसद श्री नीरज शेखर, विधान परिषद सदस्य श्री रवि शंकर सिंह, विधायक श्रीमती केतकी सिंह, श्री हंसूराम सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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