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अब बैंक ऐप के फर्जी वेबपेज के लिंक भेज अकाउंट साफ कर रहे हैं साइबर ठग

साइबर ठग लोगों के खातों में सेंध लगाने के लिए प्रतिदिन नए-नए तरीके इख्तियार कर रहे हैं। अब इनका नया हथकंडा है विभिन्न बैंकों के ऐप के नाम से फर्जी वेब पेज लिंक के जरिये चूना लगाना। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, साइबर ठग लोगों को बैंक की तरफ से ये फर्जी मैसेज भेज रहे हैं, जिसमें आपको अपना पेन कार्ड खाते से लिंक करने के लिए लिंक पर क्लिक करने का निर्देश भेज रहे है। जिसे क्लिक कर डिटेल भरते ही आपके खाते में सेंध लग रही है।

लिंक में आपका मोबाइल होता है दर्ज

दरअसल बैंक ऐप से जुड़ा लिंक क्लिक करते ही वेब पेज खुलता है। खासबात यह है कि इसमें आपका नाम और मोबाइल नंबर पहले से लिखा होता है। ऐस में आपको यह लगता है ये बैंक का ही मैसेज है, जिसे आपका नाम व मोबाइल नंबर मालूम है। लिहाजा गफलत में आकर आप इस लिंक के जरिये मांगी गई संबंधित जानकारी विभिन्न कॉलम में भर देते हैं। बस इसके बाद ही आपके खाते से रकम निकाल लेते हैं ये जालसाज।

संयुक्त जांच में हजारों पीड़ितों का पता

बैंक ऐप के नाम से दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट आईएफएसओ को जब इसकी शिकायत मिली तो एसबीआई प्रबंधन के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच शुरू की। इस विस्तृत जांच में यह पता चला कि ऐसे सैकड़ों लोगों अकाउंट से रकम साफ की गई है। खासबात यह है कि महज एक बैंक एसबीआई के खाताधारकों से ही इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ, उसमें से भी करीब 51मामले तो दिल्ली से संबंधित थे। इसके बाद जांच आरंभ की तो पुलिस के पैरों तले जमीन सरक गई। दरअसल शिकायतों की संख्या देखते ही देखते करीब एक हजार के आंकड़े को पार कर गई।

जालसाज ऐसे कर रहे हैं फर्जीवाड़ा

आरोपितों द्वारा भेजे गए लिंक की जांच की गई तो पता चला कि ये लिंक सूरत, कोलकाता, गिरडीह, जामताड़ा, धनबाद और दिल्ली एनसीआर से भेजे जा रहे थे। भेजने वालों के ठिकानों की पहचान की गई. तो यह पता चला कि आरोपी अलग-अलग मॉड्यूल बनाकर काम कर रहे थे। फिशिंग लिंक बनाने और होस्ट करने में शामिल एक मॉड्यूल शामिल था, जबकि दूसरा मॉड्यूल थोक एसएमएस और कॉल करने के लिए नकली सिम कार्ड प्राप्त करने में शामिल था।

वहीं तीसरा मॉड्यूल फ़िशिंग लिंक भेजने और पीड़ित को कॉल करने में शामिल था। अगर पीड़ित ने फ़िशिंग पेज पर ओटीपी नहीं डाला तो यही मॉड्यूल कॉल करता था। इसके अलावा चौथा मॉड्यूल पीड़ितों के नेट बैंकिंग में लॉगिन करता है और धोखाधड़ी से मिले बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर करता है। जबकि पांचवा मॉड्यूल नकली और धोखाधड़ी वाले बैंक खातों की खरीद में शामिल था और छठा मॉड्यूल बैंक खातों से पैसे निकालने का काम करता था।

क्या कर रही है दिल्ली साइबर यूनिट

पुलिस ने बैंक ऐप अपडेट के नाम पर किए जा रहे इस फर्जीवाड़े की जांच के दौरान एक पैन इंडिया जालसाज नेटवर्क पर काम कर रही है। इसके कुछ सदस्यों को आईएफएसओ यूनिट ने दबोच भी लिया है। जबकि इस तरह से फर्जीवाड़ा करने वाले इस नेटवर्क से जुड़े और अन्य बैंकों के ऐप के नाम पर भी लोगों को चूना लगाने वाले जालसाजों का पता लगाने में जुट गई है। इसक लिए पुलिस की एक विशेष टीम का गठन कर उसे ऐसे जाजसाजों के पीछे लगाया गया है।

साइबर अपराध बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

  • किसी भी ऐसे लिंक पर क्लिक करने से पहले बार-बार सोचें। अगर इसमें आपको कुछ भी संदिग्ध लगे तो उस पर बिल्कुल भी क्लिक ना करें। साथ ही आप साइबर सेल को भी जरूर सूचित करें।
  • अपनी जानकारी संभालकर रखें। अगर कंप्यूटर/स्मार्टफोन में इस तरह की जानकारी है तो उसे पासवर्ड या पैटर्न से सुरक्षित करें। सामान्य पैटर्न को साइबर हैकर आसानी से तोड़ लेते हैं।
  • फोन को लॉक रखें। अगर आपका डिवाइस खो जाता है तो उस स्थिति में आप अपने डाटा को घर बैठे मिटाने जैसी कुछ व्यवस्था जरूर बनाएं, ताकि साइबर जालसाजों से सुरक्षित रह सकें।

क्या कहते हैं साइबर अपराध के आंकड़े

  • वर्ष-2020, 31 दिसम्बर तक

कुल शिकायतें- 37,280

  • वर्ष-2019, 31 दिसम्बर तक

कुल शिकायतें- 23,300

  • वर्ष-2018, 31 दिसम्बर तक

कुल शिकायतें- 13,200

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