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कांग्रेस MLA की क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय ने बिगाड़ा अजय माकन का खेल

चंडीगढ़। कांग्रेस को झटका देते हुए भाजपा और उसके द्वारा समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार ने हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटें जीत लीं। नतीजे देर रात करीब 2:30 बजे घोषित किए गए। आपको बता दें कि यहां मतों की गिनती आठ घंटे तक बाधित रही। भाजपा उम्मीदवार कृष्ण लाल पंवार और जेजेपी और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा को निर्वाचित घोषित किया गया।

बीजेपी को मिले वोटों का मूल्य 3600 था। कार्तिकेय शर्मा को 2960 मूल्य के वोट मिले। कांग्रेस के वोटों का मूल्य 2900 आंका गया। कांग्रेस का एक वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया था। वहीं, कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने शर्मा के लिए क्रॉस वोटिंग किया। आपको बता दें कि हाल ही में उन्होंने राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा था। कांग्रेस के मुख्य सचेतक बीबी बत्रा ने कहा कि कांग्रेस के एक वोट में ‘I’ के स्थान पर टिक लगा है, जिससे यह अमान्य हो गया है।

वोट रद्द कराने के लिए ईसी में याचिका

हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही हाई वोल्टेज ड्रामा देखा गया। हालांकि मतगणना निर्धारित समय से करीब 7.5 घंटे बाद आधी रात शुरू हुई। मतगणना तब शुरू हुई जब सत्तारूढ़ भाजपा-जजपा की चुनाव आयोग में कांग्रेस के दो वोटों को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी गई।

हरियाणा के सीईओ अनुराग अग्रवाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने उन्हें सभी वोटों की गिनती करने के लिए कहा था। इसका मतलब यह हुआ कि चुनाव आयोग ने जजपा, भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार की याचिकाओं को खारिज कर दिया। आपको बता दें कि 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में 89 विधायकों ने वोट डाला था।

सूत्रों ने कहा कि भाजपा और जजपा ने यह मुद्दा उठाया कि बत्रा ने अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट विवेक बंसल से बात की थी। गठबंधन के नेताओं ने दावा किया कि इसकी अनुमति नहीं दी गई, साथ ही आरोप लगाया कि बत्रा का वोट उजागर था और अन्य पार्टियों के एजेंटों द्वारा देखा गया था और इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए।

शर्मा की मांग पर रिटर्निंग ऑफिसर आरके नंदल ने वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच की और आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने शर्मा के लिखित दावे को भी खारिज कर दिया और बत्रा को वोट डालने की अनुमति दी।

इसी तरह का बाद में जजपा एजेंट ने तब हंगामा किया जब कांग्रेस विधायक किरण चौधरी ने पार्टी एजेंट बंसल को अपना वोट दिखाया। हालांकि, वीडियोग्राफी की जांच के बाद इस दावे को भी खारिज कर दिया गया। कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई उन पहले विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज को ध्यान में रखते हुए अपना वोट डाला। सूत्रों ने बताया कि बंसल ने बिश्नोई के पार्टी प्रत्याशी को वोट नहीं देने का मुद्दा उठाया।

बसों में पहुंचे विधायक

भाजपा और जजपा विधायक निर्दलीय विधायकों (बलराज कुंडू को छोड़कर) के साथ दो बसों में पहुंचे, जबकि कांग्रेस विधायक वोट डालने के लिए एक अलग बस में एक साथ पहुंचे। पता चला है कि निर्दलीय विधायकों ने बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट डाला।

निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू, जिन्होंने कृषि कानूनों को लेकर भाजपा के खिलाफ प्रचार किया था, ने मतदान स्थल पर आने के बावजूद अपना वोट नहीं डाला। उन्होंने कहा, ”मैं भाजपा को कैसे वोट कर सकता हूं? मैं उस कांग्रेस उम्मीदवार को भी वोट नहीं दे सकता जो बाहरी है।” पता चला है कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने उन्हें शर्मा के पक्ष में वोट करने के लिए मनाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

जमकर आरोप-प्रत्यारोप

सूत्रों ने कहा कि जजपा के अधिकृत एजेंट और पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह चौटाला की कई मौकों पर प्रतिद्वंद्वी पार्टी के नेताओं के साथ बहस हुई और उनके आक्रामक रुख ने अनावश्यक तनाव पैदा किया। सूत्रों ने कहा कि चौधरी ने भी आवाज उठाई और चौटाला को कांग्रेस के वोटों को देखने के लिए लगातार झांकने की कोशिश करने के बजाय अपने कक्ष तक ही सीमित रहने को कहा।

मतदान के दौरान नंदल ने चौटाला के बैठने के तरीके पर आपत्ति जताई और उनसे कांग्रेस विधायकों के वोट देखने के लिए बाहर घूमने के बजाय अपनी कुर्सी को पीछे धकेलने के लिए कहा। चौटाला ने भी यह कहते हुए “चिल्लाया” कि आरओ उनके बैठने का तरीका नहीं बता सकता।

पहले वोट के साथ ही हंगामा
तीन उम्मीदवारों के मैदान में होने के कारण पहला वोट डालते ही उच्च-दांव वाले इस राज्यसभा चुनाव में तनाव स्पष्ट था। बीजेपी के अधिकृत एजेंट और हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने जहां पहला वोट डाला, वहीं कांग्रेस की तरफ से बीबी बत्रा के पहला वोट डालते ही बीजेपी और जेजेपी के विधायकों की ओर से आपत्तियां आने लगीं।

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