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कर्नाटक HC में सुनवाई के बीच राज्‍य के शिक्षा मंत्री ने कहा- 16 फरवरी से खुलेंगे प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज और डिग्री कॉलेज

कर्नाटक हाईकोर्ट में हिजाब विवाद मामले की सुनवाई जारी है. इस बीच राज्‍य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि 16 फरवरी से राज्य में प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज और डिग्री कॉलेज खुल जाएंगे. कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की 3 जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है. वहीं इस मामले को लेकर पूरे देश में राजनीति भी जोरों पर चल रही है. कई नेता इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान मीडिया से खास अपील की है. अदालत ने कहा है कि मीडिया से हमारा अनुरोध है कि वह अधिक जिम्मेदार बनें. हम मीडिया के खिलाफ नहीं हैं, हमारा एकमात्र अनुरोध जिम्मेदार होना है. वकील सुभाष झा ने बताया कि अदालत का अनुरोध है कि सभी पक्षों को अपने सबमिशन को नियम पुस्तिका में सीमित करना चाहिए और सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहिए. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने याचिकाकर्ता की दलीलों की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि सरकार का आदेश कानून की जरूरतों को पूरा किए बिना प्रयोग किया गया है. ये अनुच्छेद 25 के मूल में हैं और ये कानूनी रूप से टिकने वाला नहीं है. वहीं, सुनवाई के दौरान एक वकील ने अपने आवेदन में इस मुद्दे पर मीडिया और सोशल मीडिया टिप्पणियों को प्रतिबंधित करने के लिए कहा, क्योंकि अन्य राज्यों में चुनाव चल रहे हैं. इस पर हाइकोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग इस पर कंसीडर करता है तो हम इस पर विचार कर सकते हैं.

कोर्ट ने अधिवक्ता को पब्लिक ऑर्डर पर प्रकाश डालने को कहा

वहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत से पूछा कि अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) के तहत नागरिकों को मिला अधिकार क्या पूर्ण अधिकार है. उसकी कोई सीमा है या नहीं. कोर्ट ने कामत से ‘पब्लिक ऑर्डर’ क्या है, इस पर प्रकाश डालने को कहा. हालांकि, कोर्ट ने कामत से कहा कि वह सीधे इस मुद्दे पर आएं कि ये सार्वजनिक व्यवस्था का सवाल है या नहीं? कोर्ट ने कहा कि हम केवल यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सरकार ने अपने सरकारी आदेश द्वारा अनुच्छेद 25 को रद्द कर दिया है?

अधिवक्ता ने कोर्ट को इन बातों से कराया अवगत

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कामत ने कर्नाटक हाईकोर्ट को अवगत कराया कि सरकारी आदेश का कहना है कि हेडस्कार्फ पहनना अनुच्छेद 25 द्वारा संरक्षित नहीं है. सरकारी आदेश कहता है कि कॉलेज विकास समिति पर यह तय करने के लिए छोड़ देना चाहिए कि यह ड्रेस का हिस्सा होगा या नहीं. उन्होंने आगे कहा कि कॉलेज विकास समिति को यह तय करने की अनुमति देना कि छात्रों को हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति दी जाए या नहीं, पूरी तरह से अवैध है. वकील ने कहा कि क्या एक कॉलेज विकास समिति जिसमें एक विधायक और कुछ अधीनस्थ शामिल हैं, मौलिक स्वतंत्रता का प्रयोग करने का निर्णय ले सकते हैं? एक वैधानिक प्राधिकरण को हमारे मौलिक अधिकारों का संरक्षक कैसे बनाया जा सकता है?

अनुच्छेद 25 को सीमित करने के लिए सार्वजनिक व्यवस्था का सहारा ले सकता है राज्य

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, सरकार द्वारा की गई घोषणा कि हेडस्कार्फ या हिजाब पहनना अनुच्छेद 25 द्वारा संरक्षित नहीं है. ऐसा पूरी तरह से गलत है. मैं इस बार में डिटेल से बताता हूं. उन्होंने कहा, अनुच्छेद 25 को सीमित करने के लिए राज्य सार्वजनिक व्यवस्था का सहारा ले सकता है. अब, सार्वजनिक व्यवस्था राज्य की जिम्मेदारी है. क्या विधायक और अधीनस्थों की एक कॉलेज विकास समिति यह तय कर सकती है कि क्या इस अधिकार को दिया जाना चाहिए? इस मामले में, हम नैतिकता को लेकर चिंतित नहीं हैं. इसलिए राज्य सिर्फ सार्वजनिक व्यवस्था का ही सहारा ले सकता है.

कोर्ट ने अधिवक्ता से पूछे सवाल

वहीं, हाईकोर्ट ने कहा कि सवाल यह है कि क्या अनुच्छेद 25 के तहत यह अधिकार कुछ सीमाओं के साथ पूर्ण अधिकार है या सिर्फ अधिकार है? इस पर कामत ने कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत मिला अधिकार सामान्य प्रतिबंधों के अधीन नहीं हैं, जैसा कि अन्य अधिकार में हैं. हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि हम यह समझना चाहते हैं कि क्या इस सरकारी आदेश ने किसी भी तरह से अनुच्छेद 25 के अधिकारों का उल्लंघन किया है? वकील ने कहा कि अनुच्छेद 25 के अधिकार अनुच्छेद 19 के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन नहीं हैं. चीफ जस्टिस ने पूछा कि अनुच्छेद 25 ‘विषय के अधीन’ शब्दों से शुरू होता है. इसका क्या मतलब है? वकील ने कहा, सार्वजनिक व्यवस्था केवल कानून और व्यवस्था की गड़बड़ी नहीं है. जब कानून और व्यवस्था की भावना बढ़ेगी, तो वह सार्वजनिक व्यवस्था होगी.

केंद्रीय विद्यालय में मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनने की अनुमति- अधिवक्ता

वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय में मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनने की अनुमति है. कुरान कहता है कि हिजाब पहनना ‘फर्ज’ है. छात्राएं अपनी ड्रेस के समान रंग का हिजाब पहनना चाह रही हैं. कोर्ट से सवाल किया कि छात्र पिछले दो साल में कब से हिजाब पहन रही हैं? इसके जवाब में वकील ने कहा कि छात्राओं ने एडमिशन से ही हिजाब पहन रही हैं. उन्होंने कहा कि अगर कानून व्यवस्था का खतरा नहीं है तो हिजाब पहनने की अनुमति दी जानी चाहिए. दो हाईकोर्ट्स ने हिजाब पहनने की अनुमति दी है. ऐसे में राज्य को भी इसकी इजाजत देनी चाहिए. हालांकि अदालत ने अधिवक्ता के दलील सुनने के बाद मामले की सुनवाई कल तक के लिए स्थगित कर दी है.

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