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अगले महीने पीक पर पहुंच सकते हैं कोरोना के मामले, कई राज्यों में संक्रमित हुए डॉक्टर

कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) देश में बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहा है. अभी तक इस वेरिएंट के मरीजों को लेकर दुनिया में ही अफरातफरी का माहौल है, लेकिन पिछले 3 दिन में जिस तरह से देश में मरीज (patients) बढ़े हैं उससे संकेत मिल रहा है कि भविष्य भयानक हो सकता है. मुमकिन है कि जनवरी में ही इस वेरिएंट का हाहाकारी असर देश में देखने को मिले. आखिर इस आशंका की वजह क्या है. क्यों कोरोनावायरस (Coronavirus) से डरने की जरूरत है. ये सब हम आज आपको बताएंगे. खासतौर से सात दिनों के महाविकट संकट की डिटेल जानकारी देंगे, जिसमें एक्सपर्ट भारत में रोज 10 लाख से 30 लाख तक केस आने का दावा कर रहे हैं. इसकी बड़ी वजह है.

दिल्ली (Delhi ) में आज कोरोना के 19,166 नए मामले आए हैं. राजधानी दिल्ली में संक्रमण दर 25 फीसदी पर पहुंच गई है और कोरोना से 17 लोगों की मौत हुई है. दिल्ली में कोरोना केस 20 हजार के पास रहने की वजह से DDMA की बैठक में आज अहम फैसले लिए गए. दिल्ली में रेस्तरां और बार को बंद करने और केवल ‘टेक अवे’ की सुविधा दी गई है. दिल्ली के एक जोन में एक ही साप्ताहिक बाजार को खोलने की इजाजत दी गई है. इस बीच खबर ये भी है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) कोरोना संक्रमित हो गए हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कोरोनावायरस की चपेट में आ गए हैं. सीएम नीतीश डॉक्टरों की सलाह पर होम आइसोलेशन में हैं. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है.

अब सवाल है कि आज जब हर दिन दो लाख के करीब नए केस आ रहे हैं तो तीसरी लहर में नए केस का पीक क्या होगा. इस बारे में ओमिक्रॉन की सुनामी को लेकर, थर्ड वेव की पीक को लेकर, साइंटिस्ट्स और वायरस को स्टडी करनेवाले अलग-अलग आशंका जता रहे हैं. तीसरी लहर में कोरोना ब्लास्ट को लेकर अलग-अलग और बेहद चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं. एक ऐसी ही नई आशंका जताई है अमेरिकी हेल्थ एक्सपर्ट ने. इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन IHME के डायरेक्टर डॉक्टर क्रिस्टोफर के मुताबिक पीक पर पहुंचने के बाद भारत में लगभग पांच लाख मामले हर दिन आएंगे.

भारत में अगले महीने तक पीक पर पहुंच जाएंगे कोरोना के मामले

अमेरिकी हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक भारत में अगले महीने तक कोरोना के मामले पीक पर पहुंच जाएंगे. ऐसी ही डराने वाली एक और आशंका जताई गई है. अमेरिकी फर्म Nomura का दावा है कि अगर इसी रफ्तार से केस बढ़े और ओमिक्रॉन इसी तरह फैलता रहा तो फिर भारत में हर दिन कोरोना के नए केस तीन मिलियन यानी 30 लाख हो सकते हैं और ये देश में कोरोना संक्रमण का पीक होगा. हालांकि अमेरिकी फर्म ने भारत में कोरोना की तीसरी लहर का पीक जनवरी के तीसरे और चौथे हफ्ते के बीच बताया है.

तीसरी लहर में दिल्ली और मुंबई में आएंगे सबसे ज्यादा केस 

कोरोना की थर्ड वेव पर भविष्यवाणी करने वाले कई एक्सपर्ट का कहना है कि इस दौरान सबसे ज्यादा केस दिल्ली और मुंबई में आएंगे. IIT कानपुर के मैथमैटिक्स और कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल का कैलकुलेशन है कि दिल्ली और मुंबई में तीसरी लहर का पीक 15 जनवरी को आ सकता है. प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल के मुताबिक तीसरी लहर का पीक देश में इसी महीने के आखिर में आ सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली और मुंबई में 15 जनवरी के बाद 50 हजार से 60 हजार नए केस रोज आ सकते हैं. सात दिन का औसत 30,000 केस रह सकता है. यही सात दिन तीसरी लहर का संकट काल होगा.

हालांकि अमेरिका से लेकर हिंदुस्तान तक के एक्सपर्ट ये भी दावा कर रहे हैं कि भारत में इस लहर को काफी हद तक मैनेज कर लिया जाएगा, क्योंकि अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या कम होगी. लेकिन अगर कुछ हफ्तों में स्थिति बदली तो अस्पतालों में बेड की कमी पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में हालात और बदतर हो सकते हैं. गंभीर फिक्र ये है कि देश के डॉक्टर भी बहुत तेजी से वायरस की चपेट में आ रहे हैं और अगर डॉक्टर ही बीमार पड़ गए तो मरीजों का इलाज कौन करेगा?

मुंबई में ओमिक्रॉन की चपेट में 400 से ज्यादा डॉक्टर

सिर्फ मुंबई में ओमिक्रॉन की चपेट में 400 से ज्यादा डॉक्टर. बिहार में 500 से अधिक डॉक्टरों को कोरोना. ये बीते तीन-चार दिनों में आईं डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के संक्रमण की वो सबसे बड़ी खबरें हैं, जिनके चलते उस आशंका के सच होने का डर गहराने लगा है, जो फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स पर ओमिक्रॉन के अटैक को लेकर जताई गई है. आशंका है कि अगर डॉक्टरों के संक्रमण की रफ्तार यही रही तो अस्पतालों में इलाज करेगा कौन? क्या जब देश में वायरस से संक्रमण की रफ्तार पीक पर होगी तो स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा जाएगी?

ये वो सवाल हैं जो डराने वाले हैं, क्योंकि देश में फिलहाल कोरोना की तीसरी लहर का पीक क्या होगा, हर रोज कितने संक्रमित होंगे, यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है. इस सवाल का जवाब जानने के लिए साइंटिस्ट एक्सपर्ट्स की टीम रिसर्च में जुटी है. एक एक डेटा खंगाला जा रहा है. वायरस विस्फोट वाले ट्रेंड स्टडी हो रहे हैं. हर घंटे, हर मिनट ओमिक्रॉन वेरिएंट की रफ्तार की गिनती जारी है. वायरस का नया वेरिएंट कितनी तेजी से मल्टीप्लाई हो रहा है. इसे लेकर हर मॉडल पर विश्लेषण जारी है, लेकिन अगर अस्पतालों के डॉक्टर ही बीमार हो जाएंगे तो मरीजों का इलाज होगा कैसे और कौन करेगा? ये महज डर नहीं है, डर के सच होने के सबूत भी है जो अलग-अलग राज्यों के अस्पतालों से मिल रहे हैं जहां कोरोना संक्रमित डॉक्टरों की संख्या बेहद डरावनी रफ्तार से बढ़ रही है.

रिपोर्टर ने देश के अलग-अलग राज्यों के अस्पतालों की पड़ताल की है. हमने शुरुआत दिल्ली से की, जहां हालात सबसे विस्फोटक है. दिल्ली में 1000 से ज्यादा डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव हैं. दिल्ली AIIMS में 400 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित हैं. इनमें करीब 350 रेजिडेंट डॉक्टर हैं. पिछले 24 घंटे में ही 100 से ज्यादा हेल्थ केयर वर्कर्स संक्रमित हो चुके हैं. यही हाल सफदरजंग अस्पताल का है. यहां 250 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हैं. इनमें करीब 200 रेजिडेंट डॉक्टर भी शामिल हैं. आरएमएल अस्पताल में भी 150 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं. करीब 90 रेजिडेंट डॉक्टर आइसोलेशन में हैं. लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में करीब 100 रेजिडेंट डॉक्टर पॉजिटिव हो चुके हैं.

दिल्ली में पिछले 24 घंटे में 100 से ज्यादा डॉक्टर हुए संक्रमित 

दिल्ली सरकार के लोकनायक, जीटीबी और राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में हालात बदतर है. पिछले 24 घंटे में ही यहां 100 से ज्यादा डॉक्टर संक्रमित हो चुके हैं. इन अस्पतालों में कई विभाग बंद करने की नौबत आ गई है. ओटी और ओपीडी सबकुछ प्रभावित हो चुके हैं. ये दिल्ली में डॉक्टरों के संक्रमण और हेल्थ सिस्टम के चरमराने की शुरुआती जानकारी है. अगर अलग-अलग दावे पर भरोसा करें तो साफ है कि आने वाले हफ्तों में स्थिति और चिंताजनक हो सकती है. वैसे अस्पताल प्रशासन अभी से तैयारी कर रहा है. जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को हायर करने का फैसला लिया गया है. बाकायदा आदेश जारी हो गया है. अब नॉन पीजी डॉक्टर्स को कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाएगा. हालांकि सच ये भी है कि दिल्ली के एक एक अस्पताल में ओपीडी में 5000 मरीज रोजाना आते हैं. इमरजेंसी में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या भी 5000 से ज्यादा होती है. इस बोझ के साथ अगर दिल्ली में कोरोना केस भी तेजी से बढ़े तो डॉक्टरों का संक्रमण भी बढ़ेगा और हेल्थ केयर सिस्टम की हालत खराब हो जाएगी.

महाराष्ट्र में भी कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से डॉक्टर्स तेजी से हुए संक्रमित

चौंकाने वाली बात ये है कि कोरोना की दूसरी लहर में भी बड़ी संख्या में देश भर में ना सिर्फ डॉक्टर संक्रमित हुए थे बल्कि उनकी मौत भी हुई थी. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन IMA के मुताबिक दूसरी लहर के दौरान करीब 2000 डॉक्टरों की मौत हुई थी. आईएमए का दावा है कि आम लोगों की मृत्यु दर की तलना में हेल्थ वर्कर्स में मृत्यु दर ज्यादा थी. दूसरी लहर में करीब 1,00,000 डॉक्टर संक्रमित हुए थे. ऐसे में तीसरी लहर में ना सिर्फ दिल्ली बल्कि महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश में भी डॉक्टर तेजी से संक्रमित हो रहे हैं. दो साल और दो लहर. इस दौरान करोड़ों लोग संक्रमित हुए. देशभर के अस्पतालों में अफरातफरी मची, लेकिन मुश्किल वक्त में भी डॉक्टरों ने हौसला नहीं खोया. फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स संक्रमित होते रहे, बावजूद इसके खुद की जिंदगी दांव पर लगाकर लोगों को बचाते दिखे.

लेकिन तीसरी लहर में फिक्र थोड़ी ज्यादा बढ़ गई है. दिल्ली के बाद महाराष्ट्र में भी कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से डॉक्टर्स तेजी से संक्रमित हुए हैं. महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स के मुताबिक मुंबई में ही 400 से ज्यादा डॉक्टर्स कोरोना पॉजिटिव हैं. इनमें जेजे हॉस्पिटल में 100, सायन में 104, केईएम मुंबई में 88, NAIR में 59 डॉक्टर भर्ती हैं. इसके अलावा ठाणे, सोलापुर, पुणे और नांदेड़ में 50 से ज्यादा डॉक्टर कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. अगर महाराष्ट्र में इसी तरफ्तार से फ्रंटलाइन हेल्थ वॉरियर्स वायरस से बीमार हुए तो फिर आम आदमी के इलाज का क्या होगा? डॉक्टरों में बढ़ते संक्रमण का ट्रेंड महाराष्ट्र के साथ ही बिहार में भी दिख रहा है. यहां हेल्थ वर्कर्स पर कोरोना का कहर बरपा है. बिहार में अब तक 550 से ज्यादा डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट्स कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. अकेले बिहार के सबसे बड़े कोविड डेडिकेटेड अस्पताल NMCH में 309 डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव हैं. वहीं RMRI रिसर्च सेंटर में 14 वैज्ञानिक समेत 10 कर्मचारी पॉजिटिव पाए गए है.

बिहार जैसे सूबे के लिए ये हालात चिंताजनक है. बिहार की ही तरह मध्य प्रदेश में भी बड़ी तादाद में हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉक्टर्स, हेल्थ वर्कर और फ्रंटलाइन वॉरियर्स कोरोना की चपेट में आए हैं. हालांकि राज्य सरकार की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक डाटा जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्वास्थ मंत्री पूरी तैयारी का दावा कर रहे हैं. उम्मीद करें कि मध्य प्रदेश की सरकार आने वाले दिनों में हर चुनौती से निपटने में कामयाब रहे, लेकिन डॉक्टरों के संक्रमण यही स्थिति बरकरार रही तो ये चिंता का कारण बन सकता है क्योंकि देश में पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी है. अब सवाल है कि क्या समय आ गया है कि सरकार हर अस्पताल के लिए डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करें ताकि आने वाले खतरे की आशंका को कम किया जा सके? कम से कम मरीजों को देखने वाले डॉक्टर अस्पताल में मौजूद रहें.

मतलब ये कि मार्च तक राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है इसलिए लापरवाही बरतने की गुंजाइश भी नहीं है. मास्क लगाइए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहिए और बेवजह घर से बाहर निकलने से बचिए, क्योंकि अभी जो हालत दिख रहे हैं वो दिन बाद दिन विकट होते जा रहे हैं. क्या आम और क्या खास. कोई संक्रमित होने से नहीं बच रहा है. देश डेल्टा और ओमिक्रॉन का खतरा साथ-साथ झेल रहा है, लेकिन इस बीच एक नई आफत आन पड़ी है जिसका नाम है डेल्टाक्रॉन. आखिर क्या है डेल्टाक्रॉन. कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट देशभर में फैल चुका है और ये संक्रमण की तीसरी लहर के लिए जिम्मेदार है. B.1.1.529 यानी मूल ओमिक्रॉन वेरिएंट के तीन सब-लीनिएज यानी उपवंश हैं. जिनके नाम है BA.1, BA.2 और BA.3. भारत में अभी तक सिर्फ सब-लीनिएज BA.1 और BA.2 की मौजूदगी पता चली है, लेकिन BA.2 तुलनात्मक रूप से BA.1 से बहुत कम है. सब-लीनिएज नए वेरिएंट नहीं होते हैं, वो उसी वंश के होते हैं और मूल वेरिएंट से काफी समानता लिए होते हैं. आम बोलचाल में उन्हें भाई जैसा बोल सकते हैं.

देश में ओमिक्रॉन के 40 प्रतिशत से ज्यादा केस 

INSACOG के मुताबिक इनमें से उसका ‘भाई’ BA.1 तेजी से हावी हो रहा है और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में तेजी से डेल्टा वेरिएंट की जगह ले रहा है. इस वक्त देश में 40 प्रतिशत से ज्यादा केस ओमिक्रॉन के पाए जा रहे हैं और मुंबई दिल्ली, कोलकाता जैसे महानगरों में तो ओमिक्रॉन 75 प्रतिशत से ज्यादा संक्रमण के लिए जिम्मेदार है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि दूसरी लहर में मौत का तांडव करने वाला डेल्टा वेरिएंट गायब हो गया है. इस बीच वैज्ञानिकों का एक वर्ग ये भी मान रहा है कि ओमिक्रॉन एक कुदरती वैक्सीन है, जो डेल्टा को रिप्लेस करके डोमिनेंट वेरिएंट बनता जा रहा है और डेल्टा का खात्मा कर रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों का एक वर्ग ऐसा भी है, जो ओमिक्रॉन को राहत नहीं बल्कि आफत मानता है. उन्हें आशंका है कि बेहद संक्रामक ओमिक्रॉन सबसे घातक डेल्टा वेरिएंट के साथ मिलकर बेहद खौफनाक लहर ला सकता है. इस आशंका को एक नए वेरिएंट की खबर आने के बाद और ज्यादा बल मिला.

इसे डेल्टाक्रॉन नाम देते हुए साइप्रस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लियोनडिओस कोस्त्रिकिस ने दावा किया है कि ये स्ट्रेन डेल्टा और ओमिक्रॉन को जोड़ता है, क्योंकि इसमें डेल्टा और ओमिक्रॉन दोनों के लक्षण नजर आए हैं. साइप्रस में डेल्टाक्रॉन के अब तक 25 मरीज मिलने की बात कही जा रही है. इसमें 11 लोग अस्पताल में भर्ती थे, जबकि बाकी 14 आम जनता के बीच से मिले हैं. हालांकि ये कितना खतरनाक है, ये पुख्ता तौर पर अभी नहीं कहा जा सकता है. रिसर्च जारी है, लेकिन जिस तरह साइप्रस में बीते दो हफ्ते में डेली न्यू केस के आंकड़े 11 गुना से ज्यादा बढ़ गए हैं, उसने फिक्र जरूर बढ़ा दी है.

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