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पांच साल में देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का टर्नओवर होगा 15 लाख करोड़ : नितिन गडकरी

  • गडकरी ने कहा, निवेश के लिए सर्वोत्तम गंतव्य है उत्तर प्रदेश
  • ई मोबिलिटी सत्र में बोले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को यहां यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ऑटो मोबाइल सेक्टर में देश का टर्नओवर 7.8 लाख करोड़ है। हमारा लक्ष्य अगले पांच साल में देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का टर्नओवर 15 लाख करोड़ के आंकड़े पर पहुंचाना है। समयानुकूल प्रौद्योगिकी से इसे हासिल करने में सफलता भी मिल रही है।

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 के दूसरे दिन ‘ई-मोबिलिटी, व्हीकल्स एंड फ्यूचर मोबिलिटी’ विषय पर आयोजित सत्र में कहा कि उत्तर प्रदेश में पहली बार औद्योगिक विकास, कृषि विकास चलाने का काम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि (विजन) से उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल जाएगी। उत्तर प्रदेश निवेश के लिए सर्वोत्तम गंतव्य है। प्रचुर जल संसाधन, ऊर्जा, मानव संसाधन और शानदार कनेक्टिविटी से यहां ई मोबिलिटी के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। ई-मोबिलिटी के सेक्टर में उत्तर प्रदेश में निवेश कर उद्यमी पर्यावरण संरक्षण, रोजगार निर्माण और गरीबी दूर करने में भागीदारी बनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में भागीदार बन सकते हैं।

गडकरी ने कहा कि भारत 16 लाख करोड़ रुपये का एनर्जी (पेट्रोल, डीजल, गैस) का आयात करता है। यह 16 लाख करोड़ रुपये देश के बाहर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश को ऊर्जा का आयात करने वाला नहीं बल्कि निर्यात करने वाला देश बनाना है। ऊर्जा निर्यातक देश बनाने के इस परिप्रेक्ष्य में सर्वाधिक संभावना उत्तर प्रदेश में है। योगी के नेतृत्व में क्षमता है की उत्तर प्रदेश देश के उर्जा आयात में दो लाख करोड़ रुपए तक की कमी ला सकता है।

गडकरी ने कहा कि ऑटो मोबाइल सेक्टर में देश का टर्नओवर 7.8 लाख करोड़ है। विश्व के सभी ब्रांड यहां मौजूद हैं। देश में चार करोड़ लोगों को रोजगार भी इसी इंडस्ट्री से मिलता है। देश और राज्यों को जीएसटी से सर्वाधिक राजस्व भी यही इंडस्ट्री देती है। हमारा लक्ष्य अगले पांच साल में देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का टर्नओवर 15 लाख करोड़ के आंकड़े पर पहुंचाना है। समयानुकूल प्रौद्योगिकी से इसे हासिल करने में सफलता भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सर्वाधिक यंग टैलेंटेड इंजीनियरिंग मैन पावर हिंदुस्तान में है। हमारे देश के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पूरी दुनिया में मांग है।

ई व्हीकल्स की विकास की चर्चा करते हुए गडकरी ने कहा कि आज इलेक्ट्रिक कार, इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक बस, इलेक्ट्रिक ट्रक, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर इलेक्ट्रिक जेसीबी और इलेक्ट्रिक कंस्ट्रक्शन उपकरण सब कुछ बन रहे हैं। एक हजार करोड़ रुपये का रोड बनाने में 100 करोड़ रुपये डीजल पर खर्च हो जाते हैं। जबकि ई मशीनरी से यह खर्च सिर्फ 10 करोड़ होगा और 90 करोड़ रुपये बचेंगे। ऐसा होने पर हमारे कार्य बिलो टेंडर होने लगेंगे।

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए अद्यतन प्रौद्योगिकी, आर्थिक सम्भाव्यता, कच्चा माल व बाजार की उपलब्धता महत्वपूर्ण घटक होते हैं। हमारे पास बाजार की कोई कमी नहीं है। अभी देश मे 30 करोड़ वाहन हैं। 10 साल बाद जनसंख्या कम और वाहनों की संख्या अधिक होगी। परिवार में तीन सदस्य होंगे तो वाहनों की संख्या पांच होगी। दिल्ली और मुंबई में ऐसी स्थिति देखी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि वाहन उद्योग में लागत भी कम हो रही है। इसके लिए स्क्रेपिंग नीति लाई गई है। 15 लाख वाहनों को स्क्रैप करने का निर्णय लिया गया है। केंद्रीय बजट में राज्य सरकारों को भी स्कीम लाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। गडकरी ने कहा कि यदि 45 लाख पुराने वाहन स्क्रैप होंगे तो ऑटोमोबाइल कंपोनेंट 30 प्रतिशत सस्ते हो जाएंगे।

गडकरी ने बताया कि अभी देश में 20.8 लाख इलेक्ट्रिक वाहन हैं। 2021 की तुलना में इसमें 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश मे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या दो करोड़ करने का है और इसमें 50 लाख सरकारी वाहन होंगे। उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या अभी 4.50 लाख है। यहां इस क्षेत्र में कई स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं। इसे बढ़ावा मिलने पर यूपी में 10 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। इस सत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संबोधित किया। इस मौके पर योगी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र समेत शासन के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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