उत्तर प्रदेशबाराबंकी

जिला संवाददाता बनने के नियम एवं शर्तें। 1- जिला संवाददाता को सिक्योरिटी के तौर पर ₹10000/- दस हजार तहसील संवाददाता को 5000/- व ब्लॉक स्तर के संवाददाता को 3000/- जमा करने होंगे। जमा राशि पर कोई भी ब्याज नहीं देय होगा। यदि कोई भी संवाददाता संस्थान छोड़ता है या संतोषजनक का कार्य न होने पर संस्थान उसे हटाता है तो विज्ञापन एवं प्रसार के भुगतान का समायोजन करने के 3 माह बाद शेष राशि यदि कुछ बचती है तो वापिस की जाएगी। 2- संस्थान की तरफ से 10 प्रतियां निशुल्क जिला संवाददाताओं को उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अतिरिक्त जो भी प्रतियां जाएंगी उनका भुगतान ₹3 प्रति कापी के दर से संवाददाता को करना होगा। अखबार मंगवाने का खर्च प्रतिमाह 1500/- संवाददाता को भुगतान करना होगा। 3- सभी जिला संवाददाताओं को सरकारी एवं प्राइवेट विज्ञापन मिलाकर प्रतिमाह एक निर्धारित लक्ष्य पूरा करना होगा लगातार तीन महीने तक लक्ष्य पूरा न करने पर संवादाता को बिना किसी सूचना के हटाया जा सकता है और सिक्योरिटी के तौर पर जमा धनराशि भी वापस नहीं होगी। 4- हर तिमाही में प्रत्येक जिला संवाददाता का हिसाब किया जाएगा जिसमें विज्ञापनों के भुगतान, प्रसार का भुगतान एवं कमीशन के भुगतान का हिसाब प्रत्येक संवाददाता को मुख्यालय में उपस्थित होकर अनिवार्य रूप से करना होगा। 5- समाचार पत्र के गरिमा के विरुद्ध किसी प्रकार के कार्य में लिप्त होने पर प्रबंधन वैधानिक कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगा। 6- किसी भी संवाददाता को विवादित समाचार भेजने की स्वतंत्रता नहीं है यदि कोई भी ऐसा विवादित समाचार भेजता है और त्रुटिवश उसका प्रकाशन हो जाता है तो कानूनी तौर पर उसके लिए केवल और केवल संवाददाता ही जिम्मेदार होगा। 7- कोई भी संवाददाता किसी भी व्यक्ति अथवा विभाग को संस्थान के नाम से कोई भी दस्तावेज नहीं दे सकता यदि कहीं कोई दस्तावेज दिया जाना है तो वह मुख्यालय अधिकृत हस्ताक्षरी द्वारा ही दिए जाएंगे यदि कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

  • सभी सात आरोपियों पर 5.40 लाख का जुर्माना

बाराबंकी। बच्चों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने की योजना का पौने पांच करोड़ रुपये हड़पने वालों को दस-दस साल की सजा भुगतनी होगी। एमडीएम घोटाले के सभी सात आरोपियों को 10-10 वर्ष की कैद और सभी से 5.40 लाख रुपये के अर्थदंड का फैसला गुरूवार को अपर सत्र न्यायाधीश अनिल शुक्ला की अदालत ने सुना दिया।

29 दिसंबर 2018 काे तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी वीपी सिंह ने नगर कोतवाली में तहरीर देकर फर्जी तरीके से अभिलेखों में हेराफेरी कर कोषागार से अभियुक्तों के खाते में धनराशि भेजकर घोटाला करने की तहरीर दी गई थी। इस मामले में एमडीएम के जिला समन्वयक राजीव शर्मा, उसका निजी ऑपरेटर रहीमुद्दीन को नामजद किया गया था।

पुलिस विवेचना में रघुराज सिंह उर्फ किशन, रोजी सिद्​दीकी, साधना, बीएसए कार्यालय के प्रधान सहायक अखिलेश शुक्ला और वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लेखाकार असगर मेंहदी का नाम पुलिस ने बढ़ाते हुए न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया। इसके बाद आरोपी धीरे-धीरे कर न्यायालय से जमानत पर रिहा हो गए। सोमवार को अपरसत्र न्यायाधीश अनिल शुक्ला ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हे पुलिस कस्टड़ी में लेते हुए जेल भेज दिया था।

अपर सत्र न्यायाधीश ने तत्कालीन एमडीएम के जिला समन्वयक रहे राजीव शर्मा व उसके निजी ऑपरेटर रहीमुद्​दीन को 10- 10 वर्ष का कारावास और एक लाख 10 हजार- एक लाख 10 हजार का जुर्माना, रघुराज सिंह , रोज सिद़दीकी और साधना को 10- 10 वर्ष का कारावास व 30-30 हजार रुपये का जुर्माना,बीएसए कार्यालय के तत्कालीन प्रधान सहायक अखिलेश कुमार शुक्ला को 10 वर्ष कारावास व एक लाख 35 हजार जुर्माना तथा वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लेखागार रहे असगर मेंहदी को 10 वर्ष का कारावास और 95 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।

फैसले के बाद छलक पड़ी परिजनों की आंखे

एमडीएम घोटाले में सजा होने की बात तो चार दिन पहले ही अदालत पर आए आरोपियों को कस्टडी में लेने के बाद ही तय हो गई थी। क्योकि अदालत ने उन्हें सोमवार की तारीख पर ही दोषी करार दे दिया था। पहले तो इस मामले में बुधवार को सजा सुनाई जानी थी। मगर, कोर्ट की कार्रवाई पूरी न होने पर गुरूवार का दिन नियत किया गया था। गुरूवार को जब अदालत ने दोपहर बाद फैसला सुनाया तो उपस्थित आरोपियों के परिजनों की आंखें छलक पड़ी। वहीं नम आंखों के बीच आरोपी भी जेल के लिए रवाना हो गए।

अवकाश पर चल रहे प्रधान सहायक

एमडीएम घोटाले के आरोपी तत्कालीन बीएसए कार्यालय  व वर्तमान में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक पांच दिनों के अवकाश पर चल रहे है। सोमवार को कस्टडी में लेने व गुरूवार को उनको सजा भी सुना दी गई। इस बारे में जब डीआईओएस से बात की गई तो वह अनजान दिखे। उन्होंने बताया कि प्रधान सहायक पांच दिन के लीव पर है। मामले की जानकारी होने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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