उत्तर प्रदेशलखनऊ

अगली पीढ़ी को बचाना है तो फाइलेरिया की दवा खाना हैः डीजी

  • रिफ्युजल कन्वर्जन पर राज्यस्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला में बोले स्वास्थ्य महानिदेशक
  • 10 फरवरी से शुरू हो रहे एमडीए राउंड में शामिल 14 जिलों के अधिकारी बने प्रतिभागी

लखनऊ। प्रदेश में 10 फरवरी से शुरू होने जा रहे फाइलेरिया रोधी अभियान मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) में 100% कवरेज करने की कार्ययोजना बनानी है। इसके लिए दवा खाने से इनकार करने वाले लोगों को समझाकर दवा सेवन सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके लिए प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी एक ही लाइन दोहराए कि अगली पीढ़ी को बचाना है तो फाइलेरिया की दवा खाना है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरपी सिंह सुमन ने ये बातें सोमवार को रिफ्युजल कन्वर्जन पर आयोजित राज्यस्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला में कहीं।

पीसीआई इंडिया के सहयोग से स्थानीय होटल में आयोजित इस कार्यशाला में डीजी बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हमें इस बार एमडीए राऊंड में शामिल सभी 14 जिलों के 45 ब्लाक में माइक्रोप्लान बनाकर निगरानी तंत्र को मजबूत करना होगा। रोज समीक्षा करनी होगी कि आज हम लक्ष्य के कितना करीब पहुंचे। तभी शत प्रतिशत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा।

राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ एके चौधरी ने बताया कि एमडीए के पिछले राउंड में करीब 20 प्रतिशत लोगों ने दवा खाने से इनकार किया था। पिछले राउंड से सीख लेकर इस राउंड में सभी को स्वास्थ्य कर्मियों के सामने दवा खिलाना सुनिश्चित करना होगा। साथ ही दवा सेवन के बाद होने वाले संभावित प्रभावों की स्थिति में रैपिड रिस्पांस टीम को सक्रिय रखने की जरूरत पर अधिक बल देने की जरूरत है। वहीं अंतर्विभागीय सामंजस्य स्थापित कर हमें रिफ्युजल को तोड़ने के प्रयास करने की जरूरत है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक राष्ट्रीय कार्यक्रम डॉ अमित ओझा ने भी रिफ्युजल केसों पर ही ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि अगर हम रिफ्युजल तोड़कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को दवा खिलाने में सफल रहे तो लक्ष्य को हासिल कर सकेंगे।

रिफ्युजल के सभी बिन्दुओं पर चर्चा

पीसीआई इंडिया की वरिष्ठ निदेशक, फ़ाइलेरिया राजश्री दास एवं एसोसिएट निदेशक रणपाल सिंह ने रिफ्युजल के कारणों एवं उनके निवारण के बारे में विस्तार से चर्चा की। रिफ्युजल के प्रमुख कारणों में दवा सेवन का दुष्प्रभाव, दवा सेवन से जान का खतरा, सहयोग की कमी, फ़ाइलेरिया के खतरे के प्रति अनभिज्ञता, स्वास्थ्य की चिंता, उम्र को लेकर इनकार, दवा की गुणवत्ता पर अविश्वास एवं सरकारी दवाओं पर भरोसे की कमी जैसी चुनौतियाँ शामिल हैं।

इस मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से डॉ. तनुज व पाथ से डॉ शोएब अनवर ने भी अपने विचार रखे। कार्यशाला का संचालन करते हुए पीसीआई इंडिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ध्रुव प्रकाश सिंह ने रिफ्युजल के कारणों एवं इसे दूर करने की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि रिफ्युजल कन्वर्जन एमडीए की सफलता में मील का पत्थर साबित होगा। इसके लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है।

कार्यशाला में जीएचएस से अनुज घोष, सेंटर फार एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के प्रतिनिधि सहित 14 जिलों (लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी, अमेठी, बलिया, बरेली, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, जौनपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, प्रयागराज और सोनभद्र) के फाइलेरिया संबंधित अधिकारी शामिल हुए।

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