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अमेठी के बहुचर्चित जमीन विवाद में झूठ से उठा पर्दा सच्चाई आई सामने।

राजस्व विभाग की गलती और सीमा देवी की बदनीयती से शुरू हुआ यह भूमि विवाद।

जिला प्रशासन के निर्देश पर जब स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई जांच तब परत दर परत खुलती गई सच्चाई।

जांच के बाद एसडीएम द्वारा जिला प्रशासन को भेजी गई रिपोर्ट में हुआ खुलासा।

सीमा देवी की खतौनी में राजस्व विभाग की गलती से गाटा संख्या 187 के बजाय चढ़ गया 178 अर्थात जो 8 और 7 होना चाहिए था उसके स्थान पर 7 और 8 हो गया है।

अंकों के हेर फेर में खड़ा हुआ इतना बड़ा विवाद।

राजेश मसाला को बदनाम करने के लिए की गई थी यह पूरी साजिश।

राजेश को मजबूर कर पैसा ऐंठना इन लोगों का था मकसद।

पैसा ना मिलने पर राजेश को टारगेट करते हुए उनकी मान सम्मान प्रतिष्ठा को उछाला गया।

जिले के प्रथम नागरिक जिला पंचायत अध्यक्ष एवं प्रदेश के बड़े उद्योगपति राजेश कुमार अग्रहरी उर्फ राजेश मसाला की सुलतानपुर रोड स्थित टिकरी में बनी फैक्ट्री पर उसे समय विवाद खड़ा हो गया जब सीमा देवी द्वारा यह कहा गया कि गाटा संख्या 178 जिसमें राजेश मसाला की फैक्ट्री बनी है वह मेरे नाम है। मेरे द्वारा बैनामा लिया गया है जिसको राजेश मसाला द्वारा जबरदस्ती कब्जा कर लिया गया है । कुछ लोगों के द्वारा इस मामले में व्यक्तिगत इंटरेस्ट दिखाते हुए अनावश्यक रूप से तूल दिया गया। जिसमें इतने बड़े उद्योगपति का पक्ष जाने बगैर सिर्फ़ आरोप के आधार पर एकतरफा खबर चलाई गई। जिसके चलते राजेश मसाला एवं उनके पूरे परिवार को घोर मानसिक रूप से बहुत ही आघात पहुंचा। हालांकि जब यह मामला जिला प्रशासन के पास पहुंचा। तत्काल अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के निर्देश पर उप जिलाधिकारी अमेठी प्रीति तिवारी के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन एवं राजस्व की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर मौका मुआयना करते हुए ग्राम प्रधान सहित स्थानीय लोगों से जानकारी हासिल करते हुए बयान दर्ज किया। गहन जॉच के बाद एसडीएम अमेठी ने दो पेज की विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दिया। जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने लिखा है कि अभिलेखों के जांच में यह पाया गया है की वर्तमान में गाटा संख्या 178 जो चकबंदी के पूर्व गाटा संख्या 118 था जिसका संपूर्ण रकबा आकार पत्र 45 में श्याम बहादुर सिंह पुत्र बद्री सिंह के नाम अंकित हैजबकि आधार वर्ष खतौनी में गाटा संख्या 178 शिवकुमार राजकुमार अखिलेश कुमार विपिन कुमार पुत्रगण श्याम बहादुर सिंह व श्रीमती अनारकली पत्नी स्वर्गीय श्याम बहादुर सिंह के नाम गाटा संख्या 178 में हिमांशु अग्रहरी व विशाल अग्रहरी पुत्रगण राजेश कुमार अग्रहरी निवासी रायपुर फुलवारी के नाम अंकित है। हिमांशु व विशाल के नाम गाटा संख्या 178 मूल खातेदार से प्राप्त बैनामा के आधार पर अभिलेखों में दर्ज होना पाया गया है । जो की बैनामे के जरिए 21 दिसंबर 2012 के द्वारा लिया गया है। इस प्रकार गाटा संख्या 178 का संपूर्ण रकबा मूल खातेदार श्याम बहादुर सिंह के वारिसानों के नाम अथवा मूल खातेदार के द्वारा बैनामें के आधार पर क्रेतागण के नाम सही रूप में अंकित है। आधार वर्ष की खतौनी में सीमा उर्फ बड़का पत्नी राधेश्याम के नाम गाटा संख्या 178 में त्रुटि पूर्ण रूप से अंकित हो गया है। सीमा देवी द्वारा गाटा संख्या 178 का बैनामा बैजनाथ अमरनाथ व राजनाथ पुत्रगण श्याम लाल व श्रीमती रामकली पत्नी स्वर्गीय श्याम लाल के द्वारा दिनांक 9 जनवरी 2010 के आधार पर प्राप्त होना बताया गया है। मौके पर विक्रेता राजनाथ पुत्र श्याम लाल उपस्थित थे । उनके द्वारा बताया गया की गाटा संख्या 187 का पट्टा श्यामलाल को प्राप्त हुआ था। श्यामलाल के बाद मेरे व मेरे भाइयों के नाम वरासत दर्ज हुई। जो बैनामा मेंरे वा मेरे भाइयों के द्वारा सीमा देवी के पक्ष में किया गया । गाटा संख्या 187 का ही बैनामा किया गया है और बैनामे में गाटा संख्या 187 की चौहद्दी को ही दिखाया गया है। जिस पर सीमा देवी का कब्जा बैनामें के समय से ही है। गाटा संख्या 187 का संपूर्ण रकबा आकार पत्र 45 में नवीन परती के नाम दर्ज है। इसके बाद आधार वर्ष खतौनी में विभिन्न खातेदारों के नाम पट्टे के आधार पर दर्ज हुआ। गाटा संख्या 187 आधार वर्ष खतौनी मतरुफ है। इससे स्पष्ट होता है कि सीमा देवी द्वारा जो बैनामा लिया गया वह गाटा संख्या 187 में पट्टे के आधार पर शिवलाल को मिला था और शिवलाल के वारिसानो द्वारा इसी भूमि का बैनामा सीमा देवी के पक्ष में वर्ष 2010 में किया गया है। खतौनी तैयार करते समय गाटा संख्या 187 के स्थान पर गाटा संख्या 178 दर्ज हो जाने के कारण वर्तमान अभिलेख आधार वर्ष खतौनी में गाटा संख्या 178 पर त्रुटि पूर्ण रूप से सीमा का नाम अंकित हो गया है। क्योंकि गाटा संख्या 178 भूमि धरी नंबर है। इसलिए इसका पट्टा नहीं हो सकता हैसीमा देवी के द्वारा जो बैनामा पट्टेदार शिवलाल के वारिसानों के द्वारा लिया गया वह भूमि गाटा संख्या 187 की है ना कि गाटा संख्या 178 की। मौके पर उपस्थित ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामकरन यादव और अन्य लोगों के द्वारा भी लिखित रूप से बताया गया की प्रतिवादी सीमा देवी का कब्जा गाटा संख्या 187 पर है । बृजलाल पुत्र रामदयाल द्वारा बताया गया की गाटा संख्या 187 को बटाई पर सीमा देवी द्वारा दिया गया है ।जिस पर वह कृषि कार्य कर रहा है। जबकि गाटा संख्या 178 पर मौके पर राजेश मिल्क एंड एडिबल प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री बनी हुई है। जिसके मालिक हिमांशु अग्रहरि विशाल अग्रहरी पुत्रगण राजेश कुमार अग्रहरी है। फैक्ट्री की अतिरिक्त गाटा संख्या 178 की शेष भूमि पर मूल खातेदारों विपिन कुमार आदि का कब्जा है। इस प्रकार जांच से स्पष्ट हो जाता है कि गाटा संख्या 178 पर सीमा उर्फ बड़का पत्नी राधेश्याम का नाम त्रुटि पूर्ण रूप से अंकित है। सीमा का नाम गाटा संख्या 187 पर ही होना चाहिए था । गाटा संख्या 178 पर विशाल और हिमांशु पुत्र राजेश कुमार का कब्जा सही रूप से अभिलेख के अनुसार है।

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