ओपिनियनताज़ा ख़बरलाइफस्टाइलसंपादक की पसंदसियासत-ए-यूपी

हिंदू समाज के खिलाफ गहरी साजिश है जातिगत जनगणना

  • सनातन धर्म को समाप्त करने का षड्यंत्र है जातिगत जनगणना

मृत्युंजय दीक्षित


बिहार के मुख्यमंत्री व आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन के एक संभावित नेता नीतिश कुमार ने आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारतीय जनता पार्टी से मुकाबला करने के लिए बिहार में कराई गई जातिगत जनगणना की रिपोर्ट दो अक्टूबर को जारी कर दी है। विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होने के मात्र एक सप्ताह पूर्व जारी की गयी यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि यह इन नेताओं का चुनावी स्टंट मात्र है। यह रिपोर्ट तब जारी की गयी जब चारा घोटाले में दोषी घोषित जमानत पर बाहर घूम रहे लालू यादव भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जमकर जहर घोल रहे हैं। पटना में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट जारी होने के बाद संपूर्ण भारत में राजनैतिक नेताओं की ओर से मुखर बयानबाजी प्रारम्भ हो गयी और पूरे देश में जातिगत जनगणना की मांग जोर पकड़ने लगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तत्काल बयान दिया कि जब देश में उनकी सरकार आयेगी तब संपूर्ण भारत में जातिगत जनगणना करायी जायेगी और साथ ही एक नारा भी उछल दिया “जिसकी जितनी आबदी उसका उतना हक“।

वर्तमान राजनैतिक दौर में भारत के सभी विपक्षी और क्षेत्रीय दल यह सोच रहे हैं कि जातिगत जनगणना व अनुसूचित जाति, जनजति, आदिवासी व वंचित समाज को आरक्षण के नाम पर बरगलाकर भाजपा को हराया जा सकता है या फिर द्रमुक के विचारों के अनुरूप सनातन धर्म का संपूर्ण उन्मूलन संभव है । जातिगत जनगणना और उसके आधार पर हिन्दू मतों का विभाजन कराके सत्ता में आना इनका सपना है । बिहार की जातिगत जनगणना एक ऐसी निकृष्ट पहल है जो सनातन हिन्दू धर्म को कमज़ोर करेगी और समाज को जातीय संघर्ष में झोंक कर विकसित भारत के स्वप्न को चूर चूर कर देगी। जातीय जनगणना के आंकड़े जारी होने के प्रारंभ के एक –दो दिन आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन को ऐसा प्रतीत होने लगा कि वह भाजपा को दबाव में लाने में सफल हो गया है किंतु समय बीतने के साथ साथ जातिगत जनगणना एक विद्रूप राजनैतिक स्टंट के रूप में ही पहचानी जा रही है।

अब यह समाचार भी आ रहे हैं कि नीतिश कुमार ने बिहार व राष्ट्रीय राजनीति में राजनैतिक अस्तित्व को बचाए रखने और अतिपिछड़ों का नायक बनने के लिए यह रिपोर्ट जल्दबाजी में जारी कर दी है। बिहार के कई नेता व विश्लेषक यह दावा कर रहे हैं कि यह जनगणना रिपोर्ट पूरी तरह से फर्जी दावों व आंकड़ों पर आधारित है। बिहार की क्षेत्रीय पार्टी हम के नेता जीतन राम मांझी का बयान आया कि यह रिपोर्ट घर में बैठकर तेयार की गयी है और इसमें आंकड़ों में हेरफेर किया गया है। मांझी का कहना हे कि बिहार में यादव मात्र 4 प्रतिशत हैं तो उनकी संख्या 14 से अधिक कैसे हो गयी। वहीं पूर्व कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद का कहना है कि उनके घर कोई भी अधिकारी जनगणना के लिए नहीं आया और न ही उनसे हस्ताक्षर करवाये गये। बिहार की कुल जनगणना में 82 प्रतिशत हिंदू आबादी है जबकि मुस्लिम आबादी 17.7 प्रतिशत हो गयी है। यानि बिहार में हिंदू आबादी का प्रतिशत घट गया है जबकि तो मुस्लिम आबादी का 2.3 प्रतिशत बढ़ा है।

बिहार की जातिगत जनगणना में अत्यंत पिछडा वर्ग 36 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग 27.12 प्रतिशत अनुसूचित जाति 19.65 प्रतिशत अनारक्षित वर्ग केवल 15.52 प्रतिशत है। बिहार की यह जातिगत जनगणना इतने विरोधाभासों से भरी है कि यह स्वयं स्पष्ट कर रही है कि यह केवल और केवल हिंदू समाज को जाति के नाम पर बांटने का एक सुनियोजित व घृणित षड्यंत्र है। 1931 में भारत को खंड खंड करने की जो साजिश अंग्रेज नहीं कर पाये उस कार्य को पूर्ण करने का पाप अब बिहार के 73 वर्षीय मुख्यमंत्री नीतिश कुमार कर रहे हैं। नीतिश कुमार ने सोचा था कि वह ऐसा करके महानायक बन जायेंगे किंतु अब वही इस जाल में फंसते दिख रहे हैं। जातिगत जनगणना से उठे यक्ष प्रश्न न केवल नीतीश कुमार वरन आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन पर भी भारी पड़ रहे हैं। बिहार की जातिगत जनगणना की रिपोर्ट से पता चल रहा है कि नीतीश पिछड़ों व अतिपिछड़ों के नेता नहीं रह गए हैं और बिहार की राजनीति अब यादव मुस्लिम गठजोड़ की दिशा पकड़ेगी। पूरे प्रकरण में आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन और नीतिश कुमार ने अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार ली है और भाजपा को खुलकर हिन्दुत्व की राजनीति करने का निमंत्रण दे दिया है।

जातिगत जनगणना की रिपोर्ट जारी होने के बाद अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संकेत दे दिया है कि भाजपा आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन द्वारा तैयार जातिगत जनगणना की पिच पर फ्रंट फुट पर खेलेगी । प्रधानमंत्री ने पहले अपना पक्ष रखते हुए कहा कि देश में अगर सबसे बड़ी कोई आबादी है तो वह गरीब की है। गरीब का कल्याण ही मेरा मकसद है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन और कांग्रेस पर प्रश्न करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह क्या सेच रहे होंगे? वह तो कहा करते थे कि देश के संसाधनो पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है। उसमें भी मुसलमानों का सबसे पहले। कांग्रेस कह रही है कि आबादी के हिसाब से तय होगा कि पहला हक किसका होगा। क्या अलपसंख्यकों का हक कांग्रेस कम करना चाह रही है? यदि आबादी के हिसाब से ही सब तय होने वाला है तो पहला हक किसका होगा ?आबादी किसकी ज्यादा है ? कांग्रेस यह स्पष्ट करे। क्या कांग्रेस अल्पसंख्यकों को हटाना चाहती है? तो क्या सबसे अधिक आबदी वाले हिंदू आगे बढ़कर सारे हक ले लें?

इसी प्रकार उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक कार्यक्रम में कहा कि विचारों में संकीणर्ता नहीं होनी चाहिए। योगी ने कहा कि धर्म एक ही है वह है सनातन धर्म। बाकी सब संप्रदाय और उपासना पद्धति हैं। सनातन धर्म मानवता का धर्म है और अगर सनातन धर्म पर आघात होगा तो विश्व की मानवता पर संकट आ जाएगा। प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी जी के वक्तव्यों से स्पष्ट है कि अब भारतीय जनता पार्टी व उसकी समस्त सरकारें हिन्दुत्व व सनातन धर्म के अनुरूप ही कार्य करने जा रही हैं।

भविष्य की राजनीति में जातिगत जनगणना की इस रिपोर्ट से सर्वाधिक लाभ भारतीय जनता पार्टी को ही होने वाला है । जातिगत सर्वे के बाद आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन द्वारा जिसकी जितनी संख्या उतनी उसकी हिस्सेदारी का नारा बुलंद किया जा रहा है। ये नारा जितना जोर पकड़ेगा सवर्ण व ऐसी जातियां जिनकी आबादी कम होती जा रही हैं वे सभी अपने आपको असुरक्षित महसूस करेंगे और भाजपा की और आएँगी। वहीं पिछड़ी व कमजोर जातियां को लुभाने के लिए लालू यादव नीतिश कुमार या आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन के पास कुछ नहीं रह गया हैअतः बिहार का यह पूरा का पूरा कमजोर वर्ग भी अब भाजपा के पास ही जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पिछड़ा वर्ग से आने के कारण ओबीसी समाज व दलितों के मध्य एक मजबूत व लोकप्रिय चेहरा हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अभी हाल ही में विश्वकर्मा योजना लागू की ही जिसका लाभ समाज के अत्यंत पिछड़ा वर्ग को ही मिलने जा रहा है।

जातिगत आंकड़ों के साथ बिहार सरकार को सभी जातियों का आर्थिक सर्वे भी प्रस्तुत करना चाहिए था । बिहार सरकार को अब यह जवाब भी देना ही चाहिए कि आखिरकार सिर्फ मुसलमानों की संख्या इतनी तीव्रता से क्यों बढ़ रही है। विगत पांच वर्षो में जितनी आतंकवादी घटनाएं हुई हैं इसमें बिहार के मुसलमानों का लिंक ही सामने आया है। क्या बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या के कारण ही यह वृद्धि हुई है?बिहार जैसे संसाधन सीमित राज्य पर ये बोझ अतिपिछड़ा और दलित के अधिकारों का हनन है। बिहार में 30 वर्षे से पिछड़ा वर्ग के ही मुख्यमंत्री रहे हैं संभव है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व किसी अति पिछड़े नेता को आगे लाकर मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर दे।

यह भी ध्यान रहे यह वही बिहार है जहां पीएफआई जैसे संगठनों ने 2047 में भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की साजिश रची और सनातन धर्म के प्रति नफरत से भरा आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन के घटक दल इन संगठनों को संरक्षण देते रहे हैं। एक बार पूर्व प्रधनंत्री वी पी सिंह मंडल रिपोर्ट लेकर आये थे आज वह इतिहास के पन्ने से ही गायब हो गये है वहीं अति पिछड़ों को आरक्षण दिलाने की बात करने वाले कर्पूदी ठाकुर जी की सकरार ही गिर गयी थी और अब लालू यादव ओैर नीतिश की जोड़ी सहित पूरे आई,एन.डी,आई.ए. गठबंधन का और भी बुरा हश्र होने जा रहा है क्योंकि जन सामान्य अब पहले से कहीं अधिक जागरुक है।

PL News

PL News has a very strong and dedicated team of journalist, writers and content makers. This media house has proud to have eminent journalists on its board. Besides, PL News also have a team of efficient, young and dynamic budding journalists. What makes PL News unique is that it is established, run and administered by professional and highly dedicated journalists only.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button