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BJP नेता कपिल मिश्रा का विवादित बयान- अयोध्या और काशी तो हैं झांकी, भोजशाला अभी बाकी

दिल्ली के पूर्व विधायक और बीजेपी के फायर ब्रांड नेता कपिल मिश्रा ने शनिवार को मध्य प्रदेश के धार में एक विवादास्पद सांप्रदायिक बयान दे डाला. कपिल ने बेहद संवेदनशील धार की भोजशाला में कहा कि अयोध्या और काशी तो सिर्फ झलक थी, अभी भोजशाला बाकी है. कांग्रेस नेताओं ने कपिल के इस बयान पर ऐतराज जताते हुए मध्य प्रदेश सरकार से उनके खिलाफ धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने का मामला दर्ज करने के लिए कहा है. परमार वंश के राजा भोज द्वारा बनाए गए सरस्वती मंदिर जिसे भोजशाला के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि मुस्लिम शासकों ने इसे मस्जिद में बदल दिया था और आज यह विवादित स्थल बन गया है. यहां अब हिंदू समुदाय को मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा करते हैं तो मुस्लिम समुदाय यहां शुक्रवार को नमाज अदा करता है.

कपिल मिश्रा शनिवार को धार स्थित भोजशाला में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जब यहां मां सरस्वती हैं, यज्ञ कुंड है तो फिर यहां नमाज अदा करने का क्या मतलब? कपिल ने आगे कहाकि मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि जब ईद भी नहीं है तो शुक्रवार को नमाज क्यों हुई? कपिल शर्मा ने आगे कहाकि क्या देश में कोई बहुसंख्यक मंत्रालय है? क्या देश में बहुसंख्यकों के लिए कोई स्कॉलरिशप प्रोग्राम है? नहीं। उन्होंने कहाकि ओवैसी हों या दिग्विजय सिंह, यह सब सिर्फ एक समुदाय के वोट से अपनी दुकान चला रहे हैं।

विवादों में रही है भोजशाला

कपिल मिश्रा धार में आयोजित चार दिवसीय सरस्वती पूजा के पहले दिन पहुंचे थे. गौरतलब है कि धार में बनी भोजशाला का निर्माण 11वीं सदी में हुआ था. इसके अवशेषों पर हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग समय-समय पर दावा ठोंकते रहते हैं. मुस्लिमों का दावा है कि यह मस्जिद है, वहीं हिंदू इसे देवी सरस्वती का मंदिर होने की बात कहते हैं. वहीं कपिल के बयान पर कालापीपल से कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहाकि इस तरह का बयान देकर बीजेपी नेता विभिन्न समुदायों के बीच तनाव पैदा कर रहे हैं. उन्होंने कहाकि हम इस बयान की निंदा करते हैं. हम बाहरी लोगों को अपने प्रदेश का माहौल ख़राब करने की इजाजत नहीं देंगे.

बसंत उत्सव मनाया जा रहा है

हर साल मनाए जाने वाले बसंत उत्सव का यह 988 वां वर्ष है. भगवामय दिखाई दे रही भोजशाला में सुबह हनुमान चालीसा का पाठ हुआ और दोपहर में शोभायात्रा निकाली गई. यहां धर्मसभा का आयोजन भी किया गया. बसंत उत्सव में रविवार को मातृशक्ति सम्मेलन होगा व खाटू श्यामजी की भजन संध्या भी होने वाली है. इसके आलावा सोमवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा और मंगलवार को कन्या पूजन के साथ चार दिवसीय भोज उत्सव का समापन होगा.

क्या है भोजशाला

1000-1055 ईस्वी के बीच परमारवंश के राजा भोज ने धार में एक महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला व सरस्वती मंदिर के रूप में पहचाना जाने लगा था. यहां धार व आसपास के लोग अध्ययन के लिए आते थे. इस स्थान को बाद में मुस्लिम शासकों ने मस्जिद का रूप दे दिया था. बताया जाता है कि इसके अवशेष अभी भी पास ही स्थित कमाल मौलाना मस्जिद में मौजूद हैं.

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