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नये युग में जापान-भारत मैत्री

मृत्युंजय दीक्षित


अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में ठहराव आने और टैरिफ विवाद के मध्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा से दोनों देशों के मध्य जहां मैत्री प्रगाढ़ हो रही है वहीं नए अवसरों का युग भी प्रारंभ हो रहा है। जापान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गायत्री मंत्र तथा संस्कृत के श्लोकों के साथ अत्यंत भव्य स्वागत हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापान की धरती पर पैर रखने से पहले जापान ने अमेरिका के साथ अपनी द्विपक्षीय वार्ता स्थगित करके वार्ताकारों के दल की वाशिंगटन यात्रा टाल दी। यह एक अत्यंत साहसिक और कड़ा संदेश है कि अब विश्व के देश अमेरिका के आगे नतमस्तक होने वाले नहीं हैं। ज्ञातव्य है कि अमेरिका लगातार जापान पर भी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस यात्रा से पूर्व भी सात बार जापान की यात्रा कर चुके हैं किंतु ताजा यात्रा कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक रही। यात्रा में पहली बार जापान के साथ व्यापक सुरक्षा समझौता हुआ है तथा जापान ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की नीतियों का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जापानी समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ शिखर वार्ता की। इस वार्ता का उद्देश्य भारत और जापान के बीच व्यापार, निवेश और उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों सहित समग्र द्विपक्षीय संबधों को और विस्तारित करना था। दोनो देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के कारोबारी समूहों को भारत में निवेश का आमंत्रण दिया। उन्होंने जापान में बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि जापान तकनीक का पावर हाउस है और भारत प्रतिभा की महाशक्ति। दोनों देश मिलकर इस सदी की प्रौद्योगिकी क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं विशेष रूप से एआई, सेमी कंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी व अंतरिक्ष, मेट्रो नेटवर्क, विनिर्माण तथा स्टार्टअप के क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि जापान हमेशा से भारत की विकास यात्रा में एक प्रमुख भागीदार रहा है। स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में संभवित सहयोग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान 10 साल का आर्थिक रोडमैप तैयार किया गया है जिसके अंतर्गत जापान भारत में छह लाख करोड़ का निवेश करेगा। इससे पूर्व भारत -जापान शिखर वार्ता के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, विश्व की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और जीवंत लोकतंत्र के रूप में हमारी साझेदारी केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं अपितु वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक बेहतर विश्व को आकार देने में मजबूत लोकतांत्रिक देश स्वाभविक साझेदार होते हैं। आज हमने अपनी साझेदारी में एक नए और सुनहरे अध्याय की नींव रखी है। हमने अगले दशक के लिए एक रोडमैप बनाया है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे की एक विशेष बात यह भी रही कि भारत -जापान साझेदारी कोजापान में द्विदलीय समर्थन प्राप्त है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों योशीहिदे सुगा और फूमियो किशिदा से मुलाकात की। उन्होंने वहां के संसद अध्यक्ष व सांसदों के समूह के साथ चर्चा की। एक अनोखी पहल के तहत जापान के 16 राज्यों के गवर्नर ने प्रधानमंत्री से मुलाकात और निवेश आदि पर व्यापक चर्चा की।प्रधानमंत्री ने जापान के प्रधानमंत्री के साथ बुलेट ट्रेन में यात्रा की और भारतीय ड्राइवरों के साथ चर्चा की।अब इस बात की प्रबल संभावना है कि भारत में भी जल्द ही बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू हो जाएगा जिसकी तैयारी चल रही है।

भारत और जापान के बीच रक्षा, मानव संसाधन आदान -प्रदान, डिजिटल नवाचार, क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, अंतरिक्ष सहयोग और सांस्कृतिक साझेदारी सहित कुल 21 समझौते हुए हैं जो भारत- जपान मैत्री के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा अधिकांश समय प्रधानमंत्री मोदी के साथ रहे। जापान के साथ हुए 21 द्विपक्षीय समझौते ही 21वीं सदी के नए भारत की नई विकासगथा लिखने वाले हैं।

भारत और जापान के मध्य हुई इस अहम साझेदारी का दर्द अमेरिका भूल नहीं पाएगा। उसे भारत के साथ अपने रिश्ते बिगाड़ने की गलती का निश्चित रूप से पछतावा होगा। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत -जापान का अगले दशक के लिए संयुक्त दृष्टिकोण का डाक्यूमेंट भी जारी किया है। सुरक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है जिसके अंतर्गत दोनो देश आपसी संसाधनों व तकनीकी क्षमताओं का साझा उपयोग करेंगे।

दोनों देशों की सेनाओं के मध्य बेहतर सामंजस्य स्थापित किया जाएगा। चंद्रयान – 5 के लिए भी समझौता हुआ है जिसके अंतर्गत जापान के राकेट से ही अब चंद्रयान -5 लांच होगा। मानव संसाधन के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है जिसमें दोनों देश पांच वर्षों में 5 लाख लोगों को रोजगार देंगे। इसमें 50 हजार कुशल ओैर अर्ध कुशल पेशेवरों को जापान भेजा जाएगा। यह न सिर्फ व्यापारिक अपितु सांस्कृतिक और पर्यावरणीय सहयोग को भी बढ़ावा देगा।

अब जापान के विश्वविद्यालयों में अधिक से अधिक भारतीय युवा पढ़ाई कर सकेंगे। भारत और जापान के मध्य डिजिटल पार्टनरशिप को बढ़ाने पर भी समझौता हुआ है।मोबिलिटी के क्षेत्र में हाई स्पीड रेल, बंदरगाहों, विमानन और जहाज निर्माण में भी तेजी आएगी।
जापान का नया निवेश न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा अपितु भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भुमिका निभाएगा साथ ही भारत के लोगों को बेहतर जीवनशैली के विकल्प भी देगा।

भारत -जापान साझेदारी केवल आर्थिक सहयोग नहीं है अपितु यह साझा भविष्य की दिशा में एक मजबूत निवेश है। यह दोनों देशों के लिए समृद्धि और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना अति महत्वपूर्ण है कि भारत और जापान एक -दूसरे के लिए बने हैं।

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