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प्राण प्रतिष्ठा समारोह और दर्द से कराहते सेक्युलर विरोधी दल

मृत्युंजय दीक्षित


जैसे जैसे अयोध्या में दिव्य एवं भव्य राम मंदिर में प्रभु श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त निकट आ रहा है वैसे वैसे जिन रामद्रोही व मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे राजनैतिक दलों ने अपने वोटबैंक के लिए राम मंदिर को लटकाए रखा था उनका दर्द बढ़ता जा रहा है। उन्हें पता चल गया है कि एक बहुत बड़ी बाजी उनके हाथ से निकल चुकी है। यदि अब भी इन लोगो ने हिंदू विरोध व मंदिर विरोध के नाम पर विकृत बयानबाजी जारी रखी तो आगामी लोकसभा चुनावों में ये किसी भी लायक नहीं रहने वाले हैं। श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है किंतु ऐसा लग नहीं रहा कि विरोधी दलों का कोई भी नेता इसमें सम्मिलित होगा।

जिस कांग्रेस पार्टी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में 2019 में कहा था कि अभी इस मामले को न सुना जाये क्योंकि अयोध्या विवाद का समाधान हो जाने और फैसला आ जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी को उसका राजनैतिक लाभ मिल जायेगा वही कांग्रेस एक बार फिर परेशान है। यह वाही कांग्रेस है जिसने श्री राम को काल्पनिक कहकर उनके अस्तित्व को नकारा था। यह वही कांग्रेस है जिसने 6 दिसंबर के बाद भाजपा की पूर्ण बहुमत की प्रांतीय सरकारों को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया था।

यह वही कांग्रेस है जिसने प्रभु श्रीरामलला को 30 वर्षां के लंबे कालखंड तक हर प्रकार के मौसम में फटे टेंट में रहने को मजबूर कर दिया था। आज वही कांग्रेस परेशान हो रही है जिसने साघ्वी ऋतम्भरा और उमा भारती जैसी महिला संतों और राजमाता विजयाराजे सिंधिया जैसी वरिष्ठ महिला नेत्री पर भी अमानवीय अत्याचार करवाये। यह वही कांग्रेस है जिसने अयोध्या में कारसेवकों पर मुलायम सरकार द्वारा गोली चलाये जाने का खुलकर समर्थन किया था।

यह वही कांग्रेस है जिसके प्रधानमंत्री स्वर्गीय पी वी नरसिंह राव ने बाबरी विध्वंस के बाद कहा था कि वह फिर से बारी मस्जिद का उसी प्रकार से निर्माण करवायेंगे। आज वही कांग्रेस एक बार फिर मंदिर निर्माण से आहत हो रही है और अनाप- शनाप बयानबाजी करके अपनी जगहंसाई करवा रही है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी कहते हैं कि वह नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने निकले है जबकि वास्तविकता कुछ और है। वास्तविकता ये है कि कांग्रेस और उसके नेता राहुल गाँधी प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान पर बन रहे दिव्य –भव्य मंदिर से नफरत कर रहे हैं। ये नफरत इतनी है कि कर्नाटक में तीन दशक बाद राम मंदिर आंदोलन में गिरफ्तारी हुई है। यह मुस्लिम तुष्टिकरण का सबसे घिनौना उदाहरण है।

कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने पुलिस विभाग को दिशा निर्देश दिये हैं कि रामजन्मभूमि आंदोलन में शामिल रहे लोगों के नाम इस मामले में जांच के दायरे में लाए जायें जिन्हें भाजपा के शासनकाल में इस मामले में आरोप मुक्त कर दिया गया था। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का हिस्सा रहे कई भाजपा नेता अब बहुत बुजुर्ग हो चुके हैं । पुलिस ने एक विशेष जांच दल का गठन करके ऐसे मामलों में शामिल रहे 300 आरोपितों के नाम की सूची बनाई है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि कांग्रेस 31 साल पुराने अयोध्या आंदोलन में शामिल रहे हिंदू कार्यकर्ताओं को धमका रही है। यही कांग्रेस का विकृत चरित्र है। कांग्रेस का मोहब्बत का बाजार बहुत बड़ा ढोंग है।

कांग्रेस के नेता सैम पित्रोदा को प्रधानमंत्री मोदी का मंदिर जाना परेशान करता है और उन्हें लगता है कि राम मंदिर अब कोई मुददा नहीं है ।कांग्रेस द्वारा हिंदू समाज व सनातन के अपमान की सूची प्रतिदिन लम्बी होती जा रही है। कांग्रेस पार्टी ने लगातार अयोध्या आंदोलन के दौरान हिंदू समाज का उसी प्रकार अपमान किया था जैसे मुगल व अंग्रेज करते रहे थे।

कांग्रेस नेताओं भरत सिंह सोलंकी, बसंत साठे, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, शशि थरूर, चिदंबरम सभी बड़े नेताओं ने सनातन के विरुद्ध बयानबाजी की है। कांग्रेसी लेखक कुलदीप नैयर व खुशवंत सिंह ने भी हिंदू विरोधी लेख लिखे। कुछ लोग तो यहां तक कहते थे कि पहले भगवान श्रीराम का जन्म प्रमाणपत्र दिखाओ, वहां पर शौचालय बनवा दो, अस्पताल और स्कूल बनवा दो आज ये सब लोग दर्द से कराह रहे हैं।

कर्नाटक कांग्रेस के एक नेता सुदर्शन ने भव्य राम मंदिर की तुलना पुलवामा से करी है। कांग्रेस नेता उदित राज भी बहुत चिंतित हैं उन्हें लगता है कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो जाने के बाद भारत में मनुवाद की 500 वर्षों के बाद वापसी होने जा रही है, इससे बड़ा झूठ और क्या हो सकता है क्योंकि राम मंदिर आंदोलन से ही हिंदू समाज में सामाजिक समरसता का विचार प्रवाहित हो रहा है। मंदिर आंदोलन का नेतृत्व ओबीसी समाज ने ही किया है हमारे बहुत से संत दलित समाज से आते हैं।

कांग्रेस के नेतृत्व में बने इंडी गठबंधन के सभी नेताओं ने पहले भी हिंदू धर्म का जमकर मजाक उड़ाया व अपमान किया है और आज भी कर रहे हैं । इंडी गइबंधन की बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद नेता लालू यादव ने अयोध्या में दिव्य एवं भव्य राम मंदिर के उद्घाटन का मुददा उठाते हुए कहा था कि उसका राजनीतिकरण हो रहा है तो क्या जब लालू यादव ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को बिहार में गिरफ्तार करवाकर उनकी रामरथ यात्रा को रुकवा दिया था तो वह राजनीति नहीं थी?

आडवाणी जी की रथयात्रा रुकने के बाद देश के अनेक हिस्सों में दंगे भड़क उठे थे। आज उसी पार्टी के एक विधायक फतेह बहादुर ने एक आपत्तिजनक पोस्टर लगवाया जिसमें लिखा है कि मंदिर जाने का मतलब मानसिक गुलामी का मार्ग है और स्कूल जाने का मतलब जीवन में प्रकाश का मार्ग है। जब मंदिर की घंटी बजती है तो हमें संदेश देती है कि हम अंधविश्वास, पाखंड मूर्खता और अज्ञानता की ओर बढ़ रहे हैं। इस प्रकार राजद ने अपनी लाइन साफ कर दी है कि वह हमेशा हिंदू विरोधी रहेंगे और बिहार का खजाना खाली करते रहेंगे। बिहार राजद के नेता सदा ही मंदिर व हिंदू सनातन संस्कृति का अपमान करते रहते हैं।

इधर समाजवादी पार्टी के नेता भी इतने परेशान हो गये हैं कि हिंदू धर्म को धोखा बताने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने बयान दिया कि वह प्राण प्रतिष्ठा समारोह वाले दिन बाबरी मस्जिद की वापसी के लिए घर में दुआ करेंगे। यह एक बहुत ही घृणित सोच है क्योंकि अयोध्या समस्या का समाधान सुप्रीम कोर्ट से हुआ है और भव्य मंदिर के साथ ही मुस्लिम समाज को मस्जिद बनवाने के लिए भी जमीन दी गयी हे और उसका निर्माण भी प्रारम्भ होने जा रहा है। उधर हैदराबाद के ओवैसी साहब भी मुस्लिम युवाओं को भड़काने में जुट गये है कि अपनी मस्जिदें बचाओ कहीं तुम्हारी मस्जिदें छीन न ली जायें।

इस तरह की बयानबाजी को देखकर तो यही लग रहा है कि फिलहाल कोई बड़ा विपक्षी नेता प्राण -प्रतिष्ठा समारोह में नहीं जायेगा। यह सभी विध्नसंतोषी नेता दर्द से कराह रहे हैं। इनके सानिध्य के कारण जो शिवसेना कभी हिंदुत्व का एक प्रबल स्वर हुआ करती थीं आज बेतुके बोल बोल रही है और कह रही है किलोकसभा चुनाव आने दीजिए भाजपा वाले प्रभु श्रीराम को अपना उममीदवार बना देंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय भी अयोध्या से ही चलेगा।

कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इंडी गठबंधन हिंदू विरोधी, रामद्रोही तथा सनातन विरोधी है। आगामी लोकसभा चुनावों में इन लोगों को अपनी पराजय साफ नजर आ रही है और ये भी मान चुके हैं कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं।

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