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संजय गांधी अस्पताल गेट पर सत्याग्रह के तीसरे दिन बारिश में भीगते हुए कर्मचारियों ने आवाज की बुलंद।

संजय गांधी अस्पताल गेट पर कर्मचारियों का सत्याग्रह तीसरे दिन विपरीत मौसम के बावजूद रहा जारी। अपनी मांगों के समर्थन में कर्मचारियों ने आवाज बुलंद करते हुए कर्मचारियों ने बारिश में भीगते हुए की नारेबाजी । अब आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं सभी कर्मचारी। बीते 18 सितंबर को शासन एवं प्रशासन की ओर से संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर एवं सभी सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। संजय गांधी अस्पताल बंद होने के बाद वहां तैनात करीब 450 से अधिक कर्मचारी बेरोजगार एवं भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। न्यायालय स्तर पर भी मामला गया लेकिन कोई भी राहत नहीं मिली। सन 80 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने संजय गांधी की कर्मभूमि पर संसदीय क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराए जाने को लेकर 350 बेड वाले संजय गांधी चिकित्सालय की आधारशिला रखी गई थी। इस अस्पताल में अमेठी संसदीय क्षेत्र के साथ ही दर्जनों जनपद के हजारों मरीज प्रतिदिन अस्पताल के लिए आते हैं। प्रतिदिन 650 से अधिक ओपीडी तो 200 से अधिक इमरजेंसी के साथ ही 1000 से अधिक विभिन्न जांचे होती हैं। प्रतिदिन करीब 12 से 15 गंभीर मरीजों का ऑपरेशन होता था। लोगों को उच्च स्तरीय सुविधा मिलती थी। अस्पताल में उच्च स्तरीय सुविधा वाला ब्लड बैंक भी संचालित है। जिससे क्षेत्र के लोग लाभान्वित हो रहे थे। इन सब के बीच 14 सितंबर को मुसाफिरखाना कोतवाली के गांव रामशाहपुर निवासी अनुज शुक्ला की पत्नी दिव्या शुक्ला के पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए अस्पताल आई थी। ऑपरेशन थिएटर में जाने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। जिसके बाद उन्हें लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल ले जाया गया। जहां पर उनकी मौत हो गई। इस मामले में शासन और प्रशासन की ओर से 17 सितंबर को 90 दिन का समय देते हुए नोटिस जारी किया गया। लेकिन राजनीतिक विद्वेष भावना के चलते 24 घंटे के भीतर ही संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस निलम्बित कर सभी प्रकार की सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जिसके चलते अस्पताल में तैनात कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। तो वहीं प्रतिदिन आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के साथ बाजार में सैकड़ो दुकानदारों की रोजी-रोटी पर भी संकट आ गया है। इसी को लेकर कर्मचारी संघ एवं अस्पताल का पूरा स्टाफ सत्याग्रह आंदोलन कर रहा है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि पीड़ित परिवार के साथ हम लोगों की पूरी संवेदना है। लेकिन कर्मचारी मरीजों एवं अपनी रोजी-रोटी के संकट को देखते हुए आर पार की लड़ाई कर करने को तैयार हैं।

अस्पताल के वरिष्ठ कर्मचारी अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह की कार्यवाही करना न्याय संगत नहीं है। अस्पताल में तैनात 450 कर्मचारी इसी संसदीय क्षेत्र व आसपास के जनपदों के हैं। जो अब बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे में अगर अस्पताल नहीं खुलता है तो परिवार के भरण पोषण पर संकट आ जाएगा। हमारी सरकार लोगों को रोजगार देने की बात कहती है। लेकिन यहां तो हम सभी का रोजगार छीना जा रहा है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार कर मरीजों एवं कर्मचारियों का हित देखते हुए संचालित कराना चाहिए।

कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि इस तरह की कार्यवाही करना बेहद चिंता का विषय है। हम सभी अपने रोजी-रोटी के संकट को देखते हुए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा इसके लिए हमें जो कुछ करना पड़ेगा हम लोग करने को तैयार हैं।

चंद्रभान पांडेय ने कहा कि अगर संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस बहाल नहीं किया जाता तो हम लोग अपनी अंतिम सांस तक आर पार की लड़ाई लड़ेंगे।

सत्याग्रह स्थल पर कर्मचारियों ने उग्र रूप से नारेबाजी करते हुए लाइसेंस बहाली एवं संचालन की आवाज बुलंद की। इस मौके पर संजय सिंह, अरविंद श्रीवास्तव, संजय सिंह परिहार, चंद्रभान पांडे,पंकज पाठक, विजय कुमार तिवारी ज्योति गुप्त, विनोद कुमार सिंह, विपिन श्रीवास्तव, बृजेश कुमार सिंह, सीमा यादव, अवधेश तिवारी, सूरज शुक्ला, शिवांशु ,मंजू नायर, शिव प्रकाश, साधना, कामाख्या, गुड्डी देवी, ममता, फूलचंद, जुवैदा खातून, समेत कर्मचारी संघ पैरामेडिकल स्टाफ नर्सिंग स्टाफ समेत कॉन्ट्रैक्ट वर्कर मौजूद रहे।

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